पिपलीनाका क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का मामला अब प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर राजनीतिक टकराव की स्थिति में पहुंचता दिख रहा है। उज्जैन उत्तर से BJP विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने साफ कहा है कि सड़क 24 मीटर से अधिक चौड़ी की गई तो वे प्रभावित लोगों के साथ खड़े होकर जन आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। यह बयान उस विरोध के तुरंत बाद आया, जब गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में रहवासी उनके आगर रोड स्थित कार्यालय पहुंच गए थे।
मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई कार्रवाई से जुड़ी है। नगर निगम ने पिपलीनाका, गढ़कालिका से भैरूगढ़ तक प्रस्तावित चौड़ीकरण क्षेत्र में आने वाले घर और दुकान मालिकों को नोटिस बांटे। नोटिस में प्रभावित हिस्से 7 दिन के भीतर खाली करने के निर्देश दिए गए। नोटिस मिलने के बाद कई परिवारों ने दावा किया कि उनके मकानों का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है—कुछ जगह करीब 10 फीट और कुछ जगह 20 फीट तक निर्माण बचने की स्थिति बताई जा रही है।
इसी आशंका ने स्थानीय विरोध को तेज किया। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोग विधायक कार्यालय पहुंचे। बताया गया कि करीब आधे घंटे इंतजार के बाद विधायक के पहुंचते ही भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद लोगों ने उनकी गाड़ी के सामने बैठकर प्रदर्शन किया और चौड़ीकरण की सीमा कम करने की मांग दोहराई।
विधायक का बयान: 24 मीटर से आगे गए तो आंदोलन
प्रदर्शन के बाद विधायक कालूहेड़ा ने कहा कि उन्होंने क्षेत्रवासियों के दुख-दर्द को देखते हुए आश्वासन दिया है कि सड़क 24 मीटर तक ही रहे। उनका कहना था कि यदि इससे अधिक चौड़ीकरण किया गया तो वे स्वयं लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कलेक्टर से इस विषय में बात की गई है और मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा का आग्रह किया गया है।
24 मीटर की ही रोड होगी, नहीं तो आपका विधायक आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। जन आंदोलन करेंगे और मैं उसका नेतृत्व करूंगा। — अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक, उज्जैन उत्तर
विधायक ने अपने बयान में यह संकेत भी दिया कि जनभावना के अनुरूप निर्णय न होने पर क्षेत्र में असंतोष और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि शहर के भीतर छोटी बातों को तूल देने के बजाय जमीन पर असर देखने की जरूरत है, क्योंकि यहां मकान और आजीविका दोनों प्रभावित होने की चिंता सामने आ रही है।
चौड़ीकरण का दायरा और विवाद की मूल वजह
नगर निगम के जोन-1 कार्यालय की टीम ने पिपलीनाका से गढ़कालिका मंदिर, ओखलेश्वर श्मशान होते हुए भैरवगढ़ जेल चौराहे तक नोटिस जारी किए हैं। प्रशासनिक स्तर पर सड़क के चौड़ीकरण का प्रस्ताव पहले 150 फीट बताया गया था, जिसे बाद में 100 फीट किया गया। स्थानीय रहवासियों की मांग है कि इसे 80 फीट रखा जाए, ताकि बड़ी संख्या में मकान टूटने से बच सकें।
यही 80 फीट की मांग व्यावहारिक रूप से 24 मीटर सीमा से जुड़ती है, जिसे विधायक ने भी अपने बयान में आधार बनाया। रहवासियों का कहना है कि अगर चौड़ाई और बढ़ाई गई तो न सिर्फ मकानों का स्ट्रक्चर प्रभावित होगा, बल्कि दुकानों और छोटे कारोबार पर भी सीधा असर पड़ेगा।
अपनी ही सरकार के फैसले पर सार्वजनिक असहमति
इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक रूप से सबसे अहम पक्ष यह है कि विधायक कालूहेड़ा ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी की सरकार और प्रशासनिक निर्णय से असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि विधायक बनने के बाद पहली बार उन्हें लगा कि पिपलीनाका क्षेत्र के लोग वास्तविक मुसीबत में हैं और उनके पूरे मकान टूटने की नौबत आ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कलेक्टर से बातचीत में रिवाइज करने की बात हुई और 24 मीटर चौड़ाई पर विचार का सुझाव रखा गया। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अंतिम फैसला क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि निगम की ओर से मौके पर काम शुरू करने की तैयारी की बात भी सामने आई है।
पहले भी सरकार के खिलाफ रुख ले चुके हैं कालूहेड़ा
यह पहला मौका नहीं है जब अनिल जैन कालूहेड़ा ने सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपनाया हो। इससे पहले लैंड पूलिंग एक्ट के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई थी। उस समय उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि एक्ट वापस नहीं लिया गया तो किसानों के साथ आंदोलन में शामिल होंगे।
उन्होंने 17 नवंबर को भोपाल में BJP प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और किसान संघ की मौजूदगी में हुई बैठक का भी उल्लेख किया था, जिसमें एक्ट वापस लेने का निर्णय होने की बात कही गई थी। बाद में एक्ट यथावत रहने की जानकारी आने पर किसान संघ ने विरोध का फैसला किया और विधायक ने किसानों के सम्मान में आंदोलन में शामिल रहने की बात कही थी।
पिपलीनाका चौड़ीकरण विवाद में उनका नया बयान उसी राजनीतिक पृष्ठभूमि की अगली कड़ी माना जा रहा है। फिलहाल क्षेत्र में नजरें दो बिंदुओं पर हैं—क्या सड़क चौड़ाई 24 मीटर पर सीमित होती है, और क्या प्रशासन प्रभावितों को राहत देने वाला संशोधित खाका जारी करता है।






