महाकाल की नगरी उज्जैन की सड़कें सोमवार को भक्ति और परंपरा के अनूठे संगम की गवाह बनीं। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच, श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा के पंच-परमेश्वर का भव्य नगर प्रवेश हुआ। करीब एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हुई इस पेशवाई में शहरवासियों ने पूरे उत्साह के साथ संतों का स्वागत किया। यह आयोजन सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों की पहली दस्तक भी है।
शिप्रा तट स्थित अखाड़े से शुरू हुई इस पेशवाई का नजारा देखने लायक था। देशभर के विभिन्न हिस्सों से आए साधु-संतों के आगमन ने शहर के आध्यात्मिक माहौल को और भी जीवंत कर दिया। यह आयोजन उस 200 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत अखाड़ों के प्रतिनिधि कुंभ से पहले आयोजन स्थल का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हैं।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर रहेगी नजर
उज्जैन पहुंचे इन पंच-परमेश्वरों का मुख्य उद्देश्य 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को भव्य स्वरूप देना है। ये संत अगले आठ दिनों तक उज्जैन में रुकेंगे। इस दौरान वे साधु-संतों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं, जैसे कि आवास, भूमि आवंटन और अन्य सुविधाओं की विस्तृत जानकारी लेंगे और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।
“संतों का भव्य प्रवेश हुआ है और आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में संत उज्जैन पहुंचेंगे।” — महंत सत्यानंद
भ्रमणशील मंडल के महंत दुर्गादास, महंत अद्वैतानंद, महंत राम नौमी दास, सचिव हंस मुनि, महंत कोठारी सत्यानंद, मुकामी राम मुनि और मुकामी देवी दास सहित कई निर्वाण संत इस दल का हिस्सा हैं। उज्जैन में अपना कार्य पूरा करने के बाद, यह दल अगले कुंभ आयोजन स्थल नासिक के लिए प्रस्थान करेगा। इससे पहले, ये संत 2015 के सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आए थे।
अखाड़े में मनेगा होली का उत्सव
नगर प्रवेश के बाद अब संत पारंपरिक रूप से होली का उत्सव मनाएंगे। श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा में बुधवार (4 मार्च को) सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक एक विशेष होली समारोह का आयोजन किया जाएगा। इसमें सभी साधु-संत और महंत पारंपरिक तरीके से एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां साझा करेंगे। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है।






