नई दिल्ली: देशभर में होने वाली जनगणना 2027 की तैयारियां अब एक उन्नत चरण में पहुंच गई हैं। भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुछ ही दिनों में, जनगणना के पहले चरण यानी हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना के लिए फील्डवर्क कई राज्यों में शुरू होने वाला है। इस बार जनगणना का डेटा संग्रह पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों से किया जाएगा, जो पिछली जनगणनाओं से एक बड़ा बदलाव है।

यह देश की स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। पिछली जनगणना साल 2011 में हुई थी, जिसके 16 साल बाद देश की आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति की नई तस्वीर सामने आएगी। जनगणना आयुक्त ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका बहुत अहम है। जमीनी स्तर पर जनगणना का काम पूरा करने के लिए उनकी पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को लगाया जाता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि जनगणना का डेटा पूरी तरीके से गोपनीय रखा जाएगा और सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत भी इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। गृह मंत्रालय की अगुवाई में यह जनगणना प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके तहत राज्य के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए जाएंगे।

जनगणना 2027 के इरादे की गजट अधिसूचना 16 जून 2025 को जारी की गई थी। इसके पहले चरण की अवधि की अधिसूचना 07 जनवरी 2026 को जारी हुई थी। आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि जनगणना हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा। पहले चरण में पूछे जाने वाले सवालों की अधिसूचना 22 जनवरी 2026 को जारी की गई थी। दूसरे चरण की अवधि और उसमें पूछे जाने वाले सवालों की अधिसूचना बाद में जारी की जाएगी। यह भी साफ किया गया है कि जाति गणना जनगणना के दूसरे चरण में की जाएगी। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें।

जनगणना में स्वगणना की नई व्यवस्था

इस बार जनगणना में एक नई व्यवस्था स्वगणना यानी सेल्फ इन्यूमरेशन भी जोड़ी गई है। इसके जरिए लोग खुद अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। यह पहली बार है जब जनगणना में जाति के हिसाब से गणना भी की जाएगी। पहले चरण का फील्डवर्क अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा, जिसमें कुल ग्यारह राज्य शामिल किए गए हैं। इनमें केरल, तमिलनाडु और त्रिपुरा जैसे राज्य भी हैं। इस पूरी जनगणना के लिए 11000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मंजूर की गई है। जिला स्तर पर जनगणना के लिए अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है। जनगणना के लिए 19 भाषाओं में मैन्युअल तैयार किए गए हैं और संबंधित अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इसके अलावा, जनगणना के लिए एक विशेष ऐप भी 16 भाषाओं में विकसित किया गया है ताकि डेटा संग्रह को आसान और सटीक बनाया जा सके।

जनगणना में पूछे जाएंगे ये सवाल

सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले जनगणना हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग गणना के पहले चरण के दौरान लोगों से पूछे जाने वाले 34 प्रश्नों की अधिसूचना जारी कर दी है। इन सवालों का मकसद घरों और उनमें रहने वाले लोगों की बुनियादी जानकारी इकट्ठा करना है।

  • पहले चरण में घर के फर्श और छत में इस्तेमाल सामग्री के बारे में पूछा जाएगा।
  • घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या की जानकारी ली जाएगी।
  • परिवार के मुखिया का लिंग पूछा जाएगा।
  • परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार, जैसे गेहूं, चावल या अन्य, दर्ज किया जाएगा।
  • बुनियादी और आधुनिक आवश्यकताओं तक पहुंच, जैसे पानी, बिजली, शौचालय आदि, के बारे में सवाल होंगे।
  • परिवार के स्वामित्व वाले विभिन्न प्रकार के वाहनों की जानकारी भी जुटाई जाएगी।

प्रश्नों की शुरुआत भवन संख्या (नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण या जनगणना संख्या) और जनगणना मकान संख्या पूछने से होगी। इसके बाद गणनाकर्ता घर के उपयोग (जैसे आवासीय, वाणिज्यिक), उसकी स्थिति (जैसे अच्छी, मरम्मत की जरूरत) और उसमें सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की संख्या के बारे में पूछेंगे। अधिकारी परिवार के मुखिया के बारे में नाम और लैंगिक पहचान की जानकारी भी एकत्र करेंगे। ये सवाल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए समान रूप से लागू होंगे।

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर नया नियम

जनगणना 2027 में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को लेकर एक अहम और नया नियम बनाया गया है। स्व-गणना पोर्टल पर दिए गए अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) में यह साफ किया गया है कि अगर लिव-इन संबंध में रहने वाले दो लोग एक-दूसरे को हमेशा के लिए अपना मानते हैं, तो उन्हें जनगणना के दौरान वैवाहिक दंपत्ति के समान माना जाएगा। यह एक प्रगतिशील कदम है जो बदलते सामाजिक ताने-बाने को मान्यता देता है।

स्व-गणना का विकल्प चुनने वालों के लिए पोर्टल खोल दिया गया है। यह पोर्टल जनगणना के दोनों चरणों, ‘हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (एलएलओ) और जनसंख्या गणना, के लिए उपलब्ध रहेगा। पोर्टल पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की एक विस्तृत सूची दी गई है ताकि लोग देश की 16वीं जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले सवालों का आसानी से उत्तर दे सकें और किसी भी भ्रम से बच सकें। इस एफएक्यू में लिव-इन संबंधों से जुड़े सवाल का जवाब स्पष्ट रूप से दिया गया है, जो बताता है कि यदि वे जोड़े एक-दूसरे को स्थायी साथी मानते हैं, तो उन्हें विवाहित माना जाएगा। यह नियम जनगणना के आंकड़ों की सटीकता और समग्रता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।