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दावोस में EU प्रमुख का बड़ा ऐलान, भारत संग ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के बेहद करीब, बनेगा 2 अरब लोगों का बाजार

Written by:Rishabh Namdev
Published:
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में कहा कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बेहद करीब हैं। इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताते हुए उन्होंने कहा कि यह वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा।
दावोस में EU प्रमुख का बड़ा ऐलान, भारत संग ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के बेहद करीब, बनेगा 2 अरब लोगों का बाजार

भारत और यूरोपीय संघ (EU) एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के शिखर सम्मेलन में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यह बड़ा ऐलान किया। उन्होंने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार देते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के लिए दशकों की सबसे बड़ी व्यापारिक उपलब्धियों में से एक हो सकता है।

अपने भाषण में वॉन डेर लेयेन ने कहा कि हालांकि अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन दोनों पक्ष एक ऐसे समझौते के मुहाने पर हैं जो 2 अरब लोगों का विशाल बाजार बनाएगा। यह बाजार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा।

“अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बिल्कुल करीब हैं। कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा।” — उर्सुला वॉन डेर लेयेन, अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग

क्यों खास है यह समझौता?

यह प्रस्तावित समझौता ऐसे समय में वैश्विक सप्लाई-चेन की दिशा बदल सकता है, जब दुनिया भर की सरकारें अपनी आर्थिक निर्भरताओं पर नए सिरे से विचार कर रही हैं। EU के लिए यह चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ व्यापार बढ़ाने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है।

वहीं, भारत के लिए 27 देशों के इस ब्लॉक तक गहरी पहुंच उसकी निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगी। यह समझौता भारत की विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में ऊपर उठने की महत्वाकांक्षा को भी मजबूती देगा, क्योंकि EU भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

लंबी बातचीत को मिली नई रफ्तार

भारत और EU के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई मतभेदों के कारण यह लगभग एक दशक तक ठप रही। 2022 में बातचीत को फिर से गति मिली। इसके साथ ही, भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल जैसे मंचों ने अहम तकनीकों, डिजिटल गवर्नेंस और सप्लाई-चेन जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाकर बातचीत को आधुनिक स्वरूप दिया है।

बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों ने दोनों पक्षों को बातचीत में तेजी लाने के लिए प्रेरित किया है। ब्रसेल्स जहां एक-देशीय निर्भरता से बाहर निकलना चाहता है, वहीं भारत खुद को बदली हुई वैश्विक सप्लाई-चेन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

रिकॉर्ड स्तर पर व्यापार, फिर भी चुनौतियां बाकी

दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर है। 2023 में वस्तुओं का व्यापार 124 अरब यूरो तक पहुंच गया, जबकि सेवाओं का व्यापार करीब 60 अरब यूरो रहा। हालांकि, दावोस में दिखी उम्मीदों के बावजूद अभी भी कई बड़ी चुनौतियां बाकी हैं।

यूरोपीय वार्ताकार ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे क्षेत्रों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की मांग कर रहे हैं, जिन्हें भारत अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए बचाता रहा है। दूसरी ओर, भारत अपने कुशल पेशेवरों की आवाजाही के लिए बेहतर शर्तें चाहता है, जो EU में एक संवेदनशील मुद्दा है। इसके अलावा, स्थिरता मानकों और सार्वजनिक खरीद जैसे मुद्दों पर भी सहमति बननी बाकी है।

आगे की राह

माना जा रहा है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन की अगले सप्ताह होने वाली भारत यात्रा इस समझौते के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। राजनयिकों का मानना है कि इस दौरे से सबसे विवादास्पद मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर सुलझाने का मौका मिलेगा, जिससे समझौते को अंतिम रूप देने की राह आसान हो जाएगी। यदि यह समझौता सफल होता है, तो यह वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।