भारतीय राजनीति का इतिहास कई ऐसे दर्दनाक हवाई हादसों का गवाह रहा है, जिनमें देश ने अपने कई कद्दावर नेताओं को हमेशा के लिए खो दिया। आज सुबह विमान हादसे में अजित पवार के निधन की खबर ने एक बार फिर पुराने हादसों को ताजा कर दिया। ये घटनाएं सिर्फ व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि इन्होंने राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति की दिशा को भी प्रभावित किया। हर ऐसी दुर्घटना के बाद वीवीआईपी उड़ानों, छोटे विमानों और हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छिड़ जाती है, लेकिन समय के साथ ये सवाल फिर धुंधले पड़ जाते हैं।
इन हादसों ने बार-बार यह याद दिलाया है कि शीर्ष नेताओं की यात्राओं से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था में जरा सी भी चूक कितनी भारी पड़ सकती है। आइए जानते हैं उन प्रमुख हवाई दुर्घटनाओं के बारे में, जिन्होंने देश की राजनीति पर गहरा असर डाला।
संजय गांधी: सत्ता के शिखर से पहले युग का अंत
साल 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे और कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली युवा नेता संजय गांधी का निधन दिल्ली में एक विमान हादसे में हो गया। सफदरजंग हवाई अड्डे के पास उनका छोटा विमान उड़ान के दौरान करतब करते हुए क्रैश हो गया। उन्हें कांग्रेस का भविष्य माना जा रहा था और उनके निधन ने देश की राजनीतिक दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया।
माधवराव सिंधिया: कांग्रेस को बड़ा झटका
30 सितंबर 2001 को वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया का चार्टर्ड विमान उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सिंधिया समेत विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। खराब मौसम को हादसे की मुख्य वजह माना गया। सिंधिया का जाना कांग्रेस और राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति थी।
वाई.एस. राजशेखर रेड्डी: मुख्यमंत्री का आखिरी सफर
2 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टर नल्लमाला के घने जंगलों में लापता हो गया। एक बड़े खोज अभियान के बाद उनका हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त मिला। इस हादसे ने आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया, जिसका असर लंबे समय तक देखने को मिला।
जी.एम.सी. बालयोगी: जब संसद ने खोया अपना अध्यक्ष
3 मार्च 2002 को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी का हेलिकॉप्टर आंध्र प्रदेश में खराब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक पर थे। उनका निधन संसदीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक माना जाता है।
डोरजी खांडू: पहाड़ी राज्य की अपूरणीय क्षति
साल 2011 में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री डोरजी खांडू का हेलिकॉप्टर तवांग के पास लापता हो गया। कई दिनों की तलाश के बाद उनके निधन की पुष्टि हुई। इस हादसे ने एक बार फिर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हवाई यात्रा के जोखिमों को उजागर किया।
हर हादसे के बाद वही सवाल
इन सभी बड़ी दुर्घटनाओं के बाद जांच समितियां बनीं और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के आदेश दिए गए। हर बार वही सवाल उठे:
- क्या वीवीआईपी उड़ानों के लिए मौसम की जानकारी और आकलन पर्याप्त है?
- क्या छोटे विमानों और हेलिकॉप्टरों के रखरखाव और तकनीकी जांच के मानक सख्त हैं?
- क्या पायलटों की ट्रेनिंग और उड़ान के घंटों के नियमों का सख्ती से पालन होता है?
ये हादसे एक कड़वी सच्चाई हैं कि आसमान में हुई एक चूक ने कई बार राजनीति का एक पूरा अध्याय ही समाप्त कर दिया। यह सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की निरंतरता से जुड़ा एक गंभीर सवाल है।
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