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लोकसभा ने दो संसदीय समितियों का बढ़ाया कार्यकाल, जानें विकसित भारत और जन विश्वास विधेयकों की समीक्षा के लिए क्यों मिला अतिरिक्त समय

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
लोकसभा में गुरुवार को दो महत्वपूर्ण विधेयकों की समीक्षा कर रही संसदीय समितियों के कार्यकाल को विस्तार देने का फैसला किया गया है। इनमें 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' और 'जन विश्वास विधेयक' शामिल हैं, जिनका उद्देश्य क्रमशः उच्च शिक्षा और व्यापार सुगमता में सुधार करना है।
लोकसभा ने दो संसदीय समितियों का बढ़ाया कार्यकाल, जानें विकसित भारत और जन विश्वास विधेयकों की समीक्षा के लिए क्यों मिला अतिरिक्त समय

नई दिल्ली: संसद के निचले सदन लोकसभा ने गुरुवार को एक अहम फैसले में दो संसदीय समितियों के कार्यकाल को बढ़ाने की मंजूरी दे दी। यह समितियां दो महत्वपूर्ण विधेयकों- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 और जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 की गहन समीक्षा कर रही हैं। सदन ने ध्वनिमत से दोनों प्रस्तावों को अपनी स्वीकृति प्रदान की।

इन विधेयकों को देश में उच्च शिक्षा के नियामक ढांचे और व्यापार करने की सुगमता में बड़े सुधार लाने वाला माना जा रहा है। कार्यकाल बढ़ाए जाने से समितियों को इन पर विस्तृत अध्ययन के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक पर मंथन

उच्च शिक्षा के लिए एक एकल नियामक बनाने का प्रस्ताव करने वाले ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ की समीक्षा के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया गया था। समिति की अध्यक्ष और भाजपा सदस्य डी. पुरंदेश्वरी ने सदन में प्रस्ताव पेश किया कि समिति का कार्यकाल इस वर्ष के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ाया जाए।

इस विधेयक को संसद के पिछले शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था, जिसके बाद इसकी गहन समीक्षा के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के गठन की अधिसूचना जारी हुई थी। इसका लक्ष्य देश में उच्च शिक्षा प्रणाली को सुव्यवस्थित करना है।

व्यापार सुगमता के लिए ‘जन विश्वास’ विधेयक

वहीं, ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2025’ के अध्ययन के लिए गठित प्रवर समिति का कार्यकाल भी बढ़ाया गया है। भाजपा सांसद मालविका देवी ने समिति का कार्यकाल इस वर्ष 13 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव सदन के समक्ष रखा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

इस विधेयक को मानसून सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था और फिर अध्ययन के लिए प्रवर समिति को भेज दिया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य 42 विभिन्न कानूनों के 288 प्रावधानों को गैर-आपराधिक बनाना है, ताकि व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा दिया जा सके और नियामकीय बोझ को कम किया जा सके। सरकार के अनुसार, यह विधेयक ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और सतत आर्थिक विकास में सहायक होगा।

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