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अमित शाह 15 दिनों तक बंगाल में डालेंगे डेरा, सीएम ममता बनर्जी ने कसा तंज, बोलीं- 365 दिन भी रहें तो भाजपा को फायदा नहीं

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 15 दिन राज्य में रहने वाले बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शाह 365 दिन भी बंगाल में रहें तो भी भाजपा को फायदा नहीं होगा, साथ ही मालदा हिंसा के लिए बाहरी लोगों और वोट काटने की साजिश को जिम्मेदार ठहराया।
अमित शाह 15 दिनों तक बंगाल में डालेंगे डेरा, सीएम ममता बनर्जी ने कसा तंज, बोलीं- 365 दिन भी रहें तो भाजपा को फायदा नहीं

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही राज्य की सियासी गर्माहट भी अपने चरम पर है। राजनीतिक दलों के नेता एक-दूसरे पर तीखे हमले बोल रहे हैं। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर सीधा पलटवार किया है, जिसमें शाह ने पश्चिम बंगाल में 15 दिन रुककर चुनाव प्रचार करने की बात कही थी। मालदा जिले के गाज़ोल में एक विशाल चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अमित शाह भले ही 15 दिन रुकने का दावा कर रहे हों, लेकिन वे चाहें तो पूरे 365 दिन भी बंगाल में रह जाएं, तब भी भाजपा को कोई चुनावी फायदा नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि बंगाल की जनता भाजपा और उसके नेताओं को पसंद नहीं करती है, इसलिए उनकी राज्य में मौजूदगी से चुनाव के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उन्होंने भाजपा पर बंगाल की संस्कृति और पहचान को बाहरी नजरिए से देखने का आरोप लगाया।

अमित शाह के 15 दिन के प्लान पर ममता का तंज

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को सीधे मैदान में उतारने की रणनीति अपनाई है। इसी के तहत, अमित शाह ने राज्य में लंबा समय बिताने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की योजना बनाई थी। ममता बनर्जी ने इस पर हमला बोलते हुए कहा, “बंगाल दिल्ली नहीं है।” उनका यह बयान दिल्ली में केंद्र सरकार के कामकाज के तरीके पर एक सीधा कटाक्ष था। ममता ने कहा कि दिल्ली में भले ही केंद्रीय एजेंसियां, धनबल और प्रशासनिक ताकत का इस्तेमाल करके सब कुछ “मैनेज” कर लिया जाता हो, लेकिन बंगाल में यह तरीका नहीं चलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अपनी समझदारी से मतदान करती है और भाजपा चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, यहां की जनता उसे स्वीकार नहीं करेगी। यह बयान दरअसल भाजपा की “बाहरी” होने की छवि को पुख्ता करने और राज्य के स्वाभिमान को जगाने की तृणमूल कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा है। मुख्यमंत्री लगातार भाजपा को बंगाल के लिए एक बाहरी शक्ति के रूप में पेश कर रही हैं, जो राज्य की स्थानीय पहचान और संस्कृति को नहीं समझती।

मालदा हिंसा और ‘हैदराबाद के कोयल’ का आरोप

हाल ही में मालदा में न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेरने की एक गंभीर घटना सामने आई थी, जिसने राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। ममता बनर्जी ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पश्चिम बंगाल की छवि को गहरा धक्का लगा है। हालांकि, उन्होंने तुरंत यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना के पीछे स्थानीय लोगों का हाथ नहीं था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह सब “बाहर से आए लोगों और विपक्षी ताकतों” की सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में कुछ आरोपियों को कोलकाता के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है और राज्य की जांच एजेंसियां पूरी सक्रियता से कार्रवाई कर रही हैं। ममता ने इस पूरी घटना को “वोट काटने की एक बड़ी साजिश” का हिस्सा बताया। उनका यह आरोप राज्य में चुनावी हिंसा और राजनीतिक ध्रुवीकरण की आशंकाओं को और बढ़ा रहा है।

इसी चुनावी रैली में, ममता बनर्जी ने एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का नाम लिए बिना उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ओवैसी को “हैदराबाद का कोयल” बताते हुए आरोप लगाया कि यह पार्टी भाजपा को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल में सक्रिय हो रही है। ममता ने कहा, “हैदराबाद से आए ये लोग” अल्पसंख्यकों के वोटों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मतदाताओं से, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से अपील की कि वे इस “साजिश” को समझें और चुनाव में एकजुट होकर मतदान करें। तृणमूल कांग्रेस के लिए अल्पसंख्यक वोट बैंक हमेशा से एक मजबूत आधार रहा है, और AIMIM की राज्य में सक्रियता को ममता इस वोट बैंक में सेंधमारी के तौर पर देख रही हैं। उनका यह बयान अल्पसंख्यकों को भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे के खिलाफ सचेत करने की एक स्पष्ट कोशिश है।

भाजपा पर मतदाता सूची को लेकर पलटवार

भाजपा लगातार पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में “घुसपैठियों” के शामिल होने का आरोप लगाती रही है। ममता बनर्जी ने इस गंभीर आरोप पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर मतदाता सूची में सचमुच घुसपैठिए हैं, तो भाजपा भी उन्हीं वोटों से जीतकर सत्ता में आई है। मुख्यमंत्री ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि अगर भाजपा के आरोप सही हैं, तो पहले प्रधानमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर ऐसे आरोप लगाने चाहिए। ममता का यह बयान चुनावी बहस को एक बिल्कुल नए स्तर पर ले जाता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भाजपा की चुनावी वैधता पर सवाल उठाता है। यह बयान दिखाता है कि तृणमूल कांग्रेस भाजपा के हर आरोप का जवाब पूरी आक्रामकता से दे रही है और उसे रक्षात्मक स्थिति में धकेलने की कोशिश कर रही है। राज्य में घुसपैठ और नागरिकता का मुद्दा भी चुनाव के दौरान एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनता रहा है, जिस पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।

पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव दो चरणों में निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न होगा। सभी सीटों के लिए मतगणना 4 मई को होनी है। मालदा में हुई घटना, नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी और एक-दूसरे पर लगातार लग रहे आरोपों से राज्य का चुनावी माहौल अब और ज्यादा गरमा गया है। अब यह चुनावी मुकाबला सिर्फ रैलियों और भाषणों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें प्रशासन की भूमिका, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और राज्य की कानून व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक तकरार और तेज होने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि हर पार्टी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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