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कोच्चि पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, शिक्षाविदों के साथ बैठक; देश की शिक्षा नीति पर खुली बहस

Written by:Mini Pandey
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शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के लगभग 80 प्रमुख शिक्षाविद भाग ले रहे हैं, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपराओं, भाषाओं, आत्मनिर्भर शिक्षा, जीवन मूल्यों, और पर्यावरण शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
कोच्चि पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, शिक्षाविदों के साथ बैठक; देश की शिक्षा नीति पर खुली बहस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को पिरावोम में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन बैठक एवं शिक्षा सम्मेलन में हिस्सा लिया। गुरवार शाम कोच्चि पहुंचे भागवत इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के लगभग 80 प्रमुख शिक्षाविद भाग ले रहे हैं, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपराओं, भाषाओं, आत्मनिर्भर शिक्षा, जीवन मूल्यों, और पर्यावरण शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

बैठक का उद्देश्य विकसित भारत के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक ठोस रूपरेखा तैयार करना है। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय समन्वयक ए. विनोद ने बताया कि 25, 26 और 27 जुलाई को आदि शंकराचार्य के जन्मस्थान, चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन के केंद्र आदि शंकर निलयम में होने वाली इस बैठक में न्यास की पहलों जैसे ज्ञानोत्सव और ज्ञान महाकुंभ का मूल्यांकन भी किया जाएगा। ये पहल पिछले पांच वर्षों में भारतीय मूल्यों को शिक्षा में पुनः स्थापित करने के लिए कार्यरत हैं।

ज्ञान सभा का आयोजन

27 और 28 जुलाई को कोच्चि के अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में ज्ञान सभा का आयोजन होगा, जिसमें देश के 200 से अधिक विश्वविद्यालयों, शैक्षिक संस्थानों, और निजी शैक्षिक उद्यमियों के कुलपति व निदेशक शामिल होंगे। इस सभा में माता अमृतानंदमयी देवी, श्री श्री रविशंकर, डॉ. एच. नागेंद्र, और बाबा रामदेव जैसे दिग्गज भाग लेंगे। सभा का मुख्य विषय विकसित भारत के लिए शिक्षा है, जिसमें जीवन मूल्यों, नागरिक चेतना, और पर्यावरणीय स्थायित्व को शिक्षा में समाहित करने पर जोर दिया जाएगा।

नई शिक्षा नीति पर चर्चा

इस सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन, मूल्यांकन, और अनुसंधान पर भी चर्चा होगी। साथ ही, प्रयागराज में आयोजित ज्ञान महाकुंभ के संकल्प पत्रों का फॉलो-अप किया जाएगा। आयोजन को सफल बनाने के लिए 27 जुलाई को एर्नाकुलम में कार्यकर्ताओं की एक बैठक भी होगी।