केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को कहा कि सरकार संसद के मॉनसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर सहित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र किसी भी विषय से पीछे नहीं हटेगा और सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्वदलीय बैठक के बाद रिजिजू ने कहा, “हम ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए खुले हैं। सरकार और विपक्ष के बीच समन्वय होना चाहिए ताकि सदन का संचालन ठीक ढंग से हो।”
विपक्ष की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के युद्धविराम दावों को उठाने की योजना पर रिजिजू ने कहा कि सरकार सभी सवालों का जवाब संसद के अंदर देगी, बाहर नहीं। उन्होंने कहा, “हम संसद में उचित रूप से जवाब देंगे।” रिजिजू ने रचनात्मक बहस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महत्वपूर्ण मामलों पर हमेशा संसद में मौजूद रहते हैं। सरकार इस सत्र में 17 विधेयक पेश करने की तैयारी में है और सभी सवालों का जवाब देगी।
54 सदस्यों ने लिया हिस्सा
सर्वदलीय बैठक में 51 राजनीतिक दलों के 54 सदस्यों ने हिस्सा लिया। रिजिजू ने बैठक को रचनात्मक बताया और कहा कि एनडीए, यूपीए (इंडिया ब्लॉक) और निर्दलीय दलों ने अपने विचार साझा किए और विभिन्न मुद्दों पर बहस की मांग की। केंद्र ने इन बिंदुओं पर ध्यान दिया है और सत्तारूढ़ दल व विपक्ष से एकजुट होकर काम करने का आग्रह किया है। रिजिजू ने कहा, “हम अलग-अलग विचारधाराओं से हो सकते हैं, लेकिन संसद का सुचारू संचालन सबकी जिम्मेदारी है।”
महाभियोग के लिए प्रस्ताव
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के मुद्दे पर रिजिजू ने कहा कि 100 से अधिक सांसदों ने उनके महाभियोग के लिए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं जिसे सरकार इस सत्र में पेश करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पेश करने का समय अभी तय नहीं हुआ है और इसे बाद में साझा किया जाएगा। इसके अलावा, रिजिजू ने स्वीकार किया कि कम सदस्यों वाले दलों के सांसदों को बोलने के लिए कम समय मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के समक्ष उठाएगी ताकि व्यवसाय सलाहकार समिति (बीएसी) में उचित समय आवंटन सुनिश्चित हो।






