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सोमनाथ के रक्षक वेगडाजी भील और हमीरजी गोहिल को PM मोदी ने किया नमन, बोले- ‘साहस की गाथा पीढ़ियों को प्रेरणा देगी’

Written by:Ankita Chourdia
Published:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के रक्षक वीर योद्धाओं, वेगडाजी भील और हमीरजी गोहिल को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन वीरों का साहस और बलिदान भारतीय संस्कृति की अदम्य भावना का प्रतीक है और यह आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।
सोमनाथ के रक्षक वेगडाजी भील और हमीरजी गोहिल को PM मोदी ने किया नमन,  बोले- ‘साहस की गाथा पीढ़ियों को प्रेरणा देगी’

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले दो महान योद्धाओं वेगडाजी भील और वीर हमीरजी गोहिल को श्रद्धांजलि दी है। मंदिर में पूजा अर्चना और वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से उनके शौर्य, साहस और संकल्प को याद करते हुए कहा कि उनकी गाथा सोमनाथ की आत्मा में रची-बसी है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सोमनाथ की शक्ति सदियों से भारत के उन अनगिनत सपूतों के संकल्प से बनी है, जिन्होंने हर आक्रमण और मुश्किल दौर में इस पवित्र स्थल की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

वेगडाजी भील के अदम्य साहस को प्रणाम

पीएम मोदी ने अपने संदेश में विशेष रूप से वीर वेगडाजी भील का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि वेगडाजी भील का साहस सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास का एक अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री के अनुसार, जब मंदिर पर बर्बर आक्रमणकारियों का खतरा मंडरा रहा था, तब अमानवीय हिंसा की धमकियों के बावजूद वेगडाजी भील ने पवित्र स्थल की रक्षा से कोई समझौता नहीं किया। उनका यह बलिदान अटूट आस्था और दृढ़ता का प्रतीक है।

वीर हमीरजी गोहिल का शौर्य अविस्मरणीय

इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने वीर हमीरजी गोहिल के बलिदान को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि इतिहास के उस कठिन कालखंड में, जब बर्बरता और हिंसा चरम पर थी, तब वीर हमीरजी गोहिल साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बनकर खड़े रहे। पीएम मोदी ने कहा, “उनकी वीरता देशवासियों की स्मृति में युगों-युगों तक अंकित रहेगी।”


प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि इन महान योद्धाओं का बलिदान यह स्पष्ट करता है कि भारत की सनातन संस्कृति को किसी भी प्रकार के बल प्रयोग से झुकाया या कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इन वीरों का साहस और त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनका यह संदेश सोमनाथ मंदिर से जुड़े उस ऐतिहासिक संकल्प को दोहराता है, जो आस्था, शौर्य और सांस्कृतिक दृढ़ता की एक अटूट कहानी कहता है।

कौन थे वेगडाजी भील

वेगडाजी भील गुजरात क्षेत्र के भील आदिवासी समाज से जुड़े योद्धा माने जाते हैं। लोक-इतिहास और परंपरागत कथाओं के अनुसार, उन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। कहा जाता है कि आक्रमण और हिंसा की धमकियों के बावजूद वे मंदिर की सुरक्षा से पीछे नहीं हटे। वेगडाजी भील को उन असंख्य गुमनाम भारतीयों का प्रतीक माना जाता है, जिन्होंने बिना किसी राजकीय पद या सेना के समर्थन के, अपनी आस्था और भूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया। इतिहासकारों के अनुसार, सोमनाथ की रक्षा केवल राजाओं या सेनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्थानीय समुदायों और जनजातीय समाज की भी इसमें अहम भूमिका रही।

कौन थे वीर हमीरजी गोहिल

वीर हमीरजी गोहिल गुजरात के गोहिल राजपूत वंश के पराक्रमी योद्धा थे। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उन्होंने मध्यकालीन दौर में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए विदेशी आक्रमणकारियों का सामना किया। कहा जाता है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ अंतिम सांस तक युद्ध किया और मंदिर की मर्यादा की रक्षा के लिए बलिदान दिया। गुजरात के इतिहास में वीर हमीरजी गोहिल को साहस, त्याग और धर्मरक्षा के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। स्थानीय इतिहास और स्मृति परंपरा में उनका नाम उन योद्धाओं में गिना जाता है, जिन्होंने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आत्मसमर्पण नहीं किया।