प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छह दिवसीय फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे की शुरुआत फ्रांस के नीस शहर से हुई है। दरअसल अपने दौरे के पहले चरण में वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे और ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर रहेगा। खास बात यह है कि भारत और फ्रांस के संबंध सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक, शिक्षा, स्टार्टअप और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
दरअसल प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत की ओर से रक्षा तकनीक और उन्नत सैन्य सहयोग को लेकर भी कई मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
रक्षा सहयोग पर होगी खास चर्चा
दरअसल भारत और फ्रांस के बीच रक्षा क्षेत्र हमेशा से सहयोग का मजबूत आधार रहा है। इस बार भी 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील सबसे ज्यादा चर्चा में है। भारत चाहता है कि भविष्य में इन विमानों में अपनी जरूरत के अनुसार हथियार और तकनीक जोड़ने की अधिक स्वतंत्रता मिले। इसी वजह से राफेल विमान के सोर्स कोड और तकनीकी पहुंच से जुड़े मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।
बता दें कि फ्रांस पहले भी भारत को मिराज-2000, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बियां उपलब्ध करा चुका है। यही कारण है कि रूस के बाद फ्रांस भारत के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा साझेदारों में शामिल है। रक्षा क्षेत्र के अलावा साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा होने की संभावना है।
G7 समिट में भी होंगे शामिल
वहीं इस दौरे का दूसरा बड़ा पहलू टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सहयोग है। भारत और फ्रांस के बीच AI, सेमीकंडक्टर, मेडिकल टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और स्पेस सेक्टर में करीब 12 समझौतों पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, IIT, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को वैश्विक निवेशकों और कंपनियों से जोड़ना है। इससे भारतीय नवाचार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
दरअसल फ्रांस दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के कारण उसे लगातार विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता रहा है। G7 बैठक के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया का भी दौरा करेंगे, जो कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। स्वतंत्र स्लोवाकिया बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा होगा।






