रविवार को पंजाब विधानसभा में पेश हुए राज्य बजट की सबसे बड़ी चर्चा महिलाओं के लिए घोषित मासिक आर्थिक सहायता योजना को लेकर रही। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 2,60,437 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए इसे सरकार का ‘गारंटी पूरा करने वाला बजट’ बताया।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सरकार ने मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना शुरू करने की घोषणा की। इसी योजना के तहत महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। विपक्ष का कहना है कि ऐलान तो किया गया है, लेकिन इसकी समयसीमा और लागू करने का स्पष्ट ढांचा अभी सामने नहीं आया।
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इस बजट के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया। सरकार इसे वादों की दिशा में ठोस कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी घोषणा जैसी कवायद करार दे रहा है।
सरकार का फोकस: महिला सहायता योजना और ‘गारंटी’ का दावा
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने महिला हितों के लिए नई घोषणा को प्रमुखता दी। सरकार की ओर से संदेश साफ रखा गया कि महिलाओं को प्रतिमाह सहायता देने का वादा अब योजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
राज्य सरकार के मुताबिक, यह कदम उन वादों का हिस्सा है जिन्हें मौजूदा कार्यकाल में लागू करने की बात पहले से कही जाती रही है। बजट दस्तावेज के राजनीतिक संदेश में भी यही रेखांकित किया गया कि यह केवल संख्याओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता से किए वादों की पूर्ति का रोडमैप है।
विपक्ष का हमला: ‘कब मिलेगा, कैसे मिलेगा’ पर सवाल
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने बजट को फेल और खोखला बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा नई नहीं लगती, लेकिन पिछले चार साल के कार्यकाल की राशि के बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं रखी गई।
“महिलाओं को एक बार फिर झांसे में लेने के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह का ऐलान कर दिया गया है, लेकिन पिछले 4 साल के पैसे को लेकर कुछ नहीं कहा गया। यह कब और कैसे पूरा होगा, इस पर भी स्पष्टता नहीं है।”- प्रताप सिंह बाजवा
बाजवा ने यह भी कहा कि राज्य पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है, लेकिन बजट में इस मसले पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई गई। विपक्ष का आरोप है कि बजट की बड़ी घोषणाएं तब तक अधूरी मानी जाएंगी, जब तक इनके वित्तीय स्रोत और क्रियान्वयन की समयरेखा सार्वजनिक रूप से साफ न हो।
डॉ. गुरप्रीत कौर की प्रतिक्रिया: महिलाओं को लाभ का दावा
मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने महिला सहायता योजना को महत्वपूर्ण घोषणा बताया। उनका कहना है कि महिलाओं की तरफ से लंबे समय से इस वादे पर सवाल उठते रहे थे और अब सरकार ने इसे पूरा करने की दिशा में कदम रखा है।
“पंजाब की महिलाएं लगातार इस वादे को लेकर सवाल करती थीं, अब सरकार ने वादा पूरा कर दिया है और इससे महिलाओं को लाभ मिलेगा।”- डॉ. गुरप्रीत कौर
सरकार समर्थक खेमे में इस घोषणा को सामाजिक सुरक्षा और घरेलू आर्थिक सहयोग से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि राजनीतिक स्तर पर बहस इस बात पर केंद्रित है कि योजना का लाभ किस दायरे में, किन शर्तों पर और किस प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए दिया जाएगा।
बजट पर आगे क्या देखना होगा
पंजाब के इस बजट ने एक तरफ महिलाओं के लिए घोषित आर्थिक सहायता के कारण स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है, तो दूसरी तरफ क्रियान्वयन को लेकर कई प्रश्न भी छोड़ दिए हैं। विधानसभा में पेश दस्तावेज ने कुल आकार, प्राथमिकताओं और सरकार के दावे सामने रख दिए हैं, लेकिन वास्तविक असर योजना की अधिसूचना, पात्रता मानदंड और भुगतान व्यवस्था तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल तस्वीर दो हिस्सों में बंटी है-सरकार इसे वादा पूरा करने की दिशा में ठोस कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अधूरी घोषणा मान रहा है। आने वाले समय में योजना की आधिकारिक रूपरेखा और बजटीय प्रावधानों की व्यवहारिक स्थिति इस बहस का केंद्र बनेगी।