कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया है। गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पूरी तरह से निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य है। राहुल गांधी ने इस टिप्पणी को सिर्फ खरगे का नहीं, बल्कि देश के पूरे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज का अपमान बताया है।

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में मल्लिकार्जुन खरगे के कद और प्रतिष्ठा को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि खरगे देश के एक वरिष्ठ, लोकप्रिय दलित और जननेता हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा, उनका अनुभव, उनका कद और उनकी प्रतिष्ठा अतुलनीय है। गांधी के मुताबिक, ऐसे वरिष्ठ नेता का अपमान किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि यह इस देश के एससी-एसटी समाज के करोड़ों लोगों का सीधा अपमान है। यह टिप्पणी लाखों दलितों की भावनाओं को आहत करती है, जो खरगे को अपने प्रतिनिधि के रूप में देखते हैं।

राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस पर साधा निशाना

गांधी ने हिमंत बिस्वा सरमा की इस टिप्पणी को बीजेपी और आरएसएस की पुरानी और सुनियोजित मानसिकता का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक स्थापित पैटर्न है। राहुल गांधी के अनुसार, बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा में दलित नेताओं को नीचा दिखाना और उन्हें अपमानित करना शामिल है, खासकर तब जब वे सच बोलने की हिम्मत करते हैं। यह उनकी राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा बन गया है, जहां विरोधियों को व्यक्तिगत हमलों के जरिए कमजोर करने की कोशिश की जाती है।

कांग्रेस नेता ने बीजेपी और आरएसएस के इस कथित इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान हो, दलित नेताओं को लगातार नीचा दिखाना हो, या एससी-एसटी समाज के प्रतिनिधियों पर व्यक्तिगत हमले करना हो, बीजेपी और आरएसएस का इतिहास इस बात का गवाह है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि जब-जब कोई दलित नेता सच बोलने का साहस दिखाता है, तब-तब ये उसे अपमानित करने पर उतर आते हैं। गांधी के मुताबिक, यही उनकी असली विचारधारा है, यही उनका वास्तविक चरित्र और चेहरा भी है, जो समय-समय पर सामने आता रहता है।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगा जवाब

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के अंत में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा। उन्होंने पूछा, “क्या आप हिमंत सरमा की इस भाषा का समर्थन करते हैं?” गांधी ने प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी इस मामले में सिर्फ मजबूरी नहीं है, बल्कि यह उनकी सहमति मानी जाएगी। यह टिप्पणी प्रधानमंत्री की नैतिक जिम्मेदारी और दलित समुदाय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सीधा सवाल उठाती है।

गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए आगे लिखा कि अगर वह देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर हमला होते देख भी अपना मुंह नहीं खोलते हैं, तो वह सिर्फ अपनी जिम्मेदारी से भाग ही नहीं रहे हैं, बल्कि उस अपमान के हिस्सेदार भी बन रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस गंभीर मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर सकता है, जहां दलित सम्मान और राजनीतिक भाषा की मर्यादा पर बहस तेज होने की संभावना है।