रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 14 जुलाई को भारतीय रेलवे के लिए 8 संरचनात्मक सुधारों (Railway Reforms) का ऐलान किया है। यह बदलाव “52 हफ्ते में 52 सुधारों” का हिस्सा हैं। इन बदलावों सूची में “वन नेशन, वन CTO लाइसेंस”, कंटेनरों में परिवहन की मंजूरी, QR आधारित स्किल कार्ड, रेल भूमि पोर्टल इत्यादि शामिल हैं। भारतीय रेलवे ने फ्लाई ऐश के लिए एक कंटेनरीकृत परिवहन प्रणाली लागू की है। इस नीति के तहत ISO-मानक कंटेनरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इन कंटेनरों को टॉप लोडिंग व्यवस्था के जरिए सीधे पावर प्लांट से लोड किया जाएगा। साइड डिस्चार्ज सिस्टम का इस्तेमाल करके अनलोड किया जा सके। इससे धूल प्रदूषण कम होगा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, “बंद कंटेनर प्रणाली प्रदूषण मुक्त परिवहन को संभव बनाएगी। साथी सीमेंट संयंत्रों में सामग्री की जरूरत होने तक सुरक्षित भंडारण की सुविधा भी प्रदान करेगी।”
ठेकेदारों के लिए नियम बदले
ठेकेदारों के लिए नियम सख्त करने सख्त किए हैं। अब ठेकेदार से परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के रूप में 10% तक की राशि पहले ही ली जाएगी। रेल परियोजनाओं निष्पादन के दौरान जवाबदेही को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। जिन ठेकेदारों के कुल मूल्य के 50% से अधिक मुकदमे लंबित है, वे रेलवे विविधताओं में भाग लेने के लिए पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा ठेकेदार के सर्वजोखिम बीमा और पेशेवर क्षतिपूर्ति बीमा को भी शामिल किया गया है।
रेल भूमि पोर्टल लॉन्च
रेल मंत्री ने रेल भूमि पोर्टल भी लॉन्च किया है। यह CRIS द्वारा विकसित एक वेब बेस्ड प्लेटफार्म है। इससे भूमि अधिग्रहण डिजिटल होगी। यह रेलवे के विभिन्न एप्लिकेशन को एकत्रित करता है। जिससे सूचनाओं का सुगम आदान-प्रदान होता है। इस पोर्टल के जरिए भूमि अधिग्रहण में तेजी आएगी इसके अलावा समय में भी 40% तक कमी आने की उम्मीद है। वर्तमान में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया मैनुअल और पेपर-आधारित है।
वन नेशन, वन CTO लाइसेंस लागू
रेलवे ने कंटेनर क्षेत्र में थी बड़ा बदलाव किया है। एकीकृत अखिल भारतीय कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस (वन नेशन, वन CTO लाइसेंस) लागू किया गया है। नए नियमों के तहत संचालकों को श्रेणी आधारित प्रतिबंधों के बिना भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनों को चलाने की सुविधा मिली मिलेगी। सभी मार्गों पर लागू होने वाला 25 करोड़ रुपये की एक समान गैर वापसी योग पंजीकरण शुल्क के माध्यम से पंजीकरण प्रणाली को भी आसान बनाया गया है।
इन बदलावों को भी जानें
- उर्वरकों की ढुलाई भी अब आसान बनाई गई है। कंटेनर में भी परिवहन को मंजूरी दी गई है। माल ढुलाई शुल्क को “प्रति टन प्रति किलोमीटर” के आधार पर तय किया जाएगा।
- रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में कारीगरों की कौशल प्रदान करने की नई नीति लागू की गई है। जिसके तहत सफल उम्मीदवारों को QR युक्त कौशल प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाया जाएगा, जो एक सक्रिय सत्यापन डेटाबेस से जुड़ा होगा।
- निजी कंपनियों को रेलवे वैगन डिजाइन करने की अनुमति दी गई है। रेलवे का आरडीएसओ ऐसे डिजाइनों का मूल्यांकन करेगा।
- तेल कंपनियों को खरीद या लीज पर टैंक वैगन लेने की अनुमति दी गई है।
- अनाज, आटा और दालों ढुलाई परिवहन कंटेनरों के जरिए होगी। फूड ग्रेंस ट्रांसपोर्टेशन के लिए कई तरीके के फ्रेट स्लैब बनाए गए हैं। इसे भी प्रति टन- प्रति किलोमीटर के आधार पर तय किया गया है।
रेलवे में फ़ूडग्रेन्स ट्रांसपोर्टेशन के लिए कई तरीके के फ्रेट स्लैब बने हुए हैं अब इसे बदलकर कर प्रति टन – प्रति किलोमीटर बेसिस पर तय किया गया है : माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/TEZI4ZBFI0
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) July 14, 2026
🚆 Railway Reform in 2026
➡️ Simplifying Container Train Operations across India✅ One unified Pan-India license
✅ Easier business & faster approvals
✅ Greater ease of doing business pic.twitter.com/tXUH47EJwf— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) July 14, 2026






