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सुप्रीम कोर्ट ने NCERT पुस्तक विवाद में तीन शिक्षाविदों की माफी स्वीकार की, ब्लैकलिस्टिंग का आदेश वापस लिया

Written by:Shruty Kushwaha
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पहले दिए गए निर्देश में उन्हें पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक निर्माण से अलग रखने की बात कही गई थी, जिसे अब वापस ले लिया गया है। अदालत ने कहा कि संबंधित सामग्री पर आपत्तियां बनी रहने के बावजूद माफी और दलीलों को ध्यान में रखते हुए कठोर आदेश हटाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में न्यायपालिका पर विवादित अध्याय लिखने वाले तीन शिक्षाविदों की माफी स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी अपने पहले के आदेश को वापस ले लिया है। इससे पहले मार्च में दिए अपने आदेश में अदालत ने कहा था कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सभी शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया था कि तीनों शिक्षाविदों को पाठ्यपुस्तक लेखन और पाठ्यक्रम निर्माण जैसी शैक्षणिक गतिविधियों से अलग रखा जाए।

यह मामला एनसीईआरटी की एक किताब में शामिल कथित विवादित सामग्री को लेकर उठा था, जिस पर आपत्ति जताते हुए याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा शिक्षा सामग्री की निष्पक्षता और संवेदनशील विषयों के प्रस्तुतीकरण से जुड़ा हुआ बताया गया

सुप्रीम कोर्ट ने तीन शिक्षाविदों के खिलाफ पहले दिया आदेश वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तीन शिक्षाविदों प्रोफेसर माइकल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार के खिलाफ मार्च में दिए गए आदेश को संशोधित कर दिया। पहले के आदेश में कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों और शैक्षणिक संस्थानों को इन तीनों को पाठ्यपुस्तक और पाठ्यक्रम निर्माण से अलग रखने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि आवेदकों द्वारा दी गई व्याख्या को ध्यान में रखते हुए वह आदेश के पैरा 8 को संशोधित कर रहा है और सरकारों एवं संस्थानों को इन तीनों को शैक्षणिक गतिविधियों से अलग करने का निर्देश वापस ले रहा है।

नए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अध्याय “पूरी तरह अवांछनीय” था लेकिन आवेदकों की व्याख्या को देखते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई वाले हिस्से को हटा लिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के बारे में दी जाने वाली जानकारी संतुलित और सही होनी चाहिए। यह फैसला उन आवेदनों पर आया जिनमें तीनों शिक्षाविदों ने कोर्ट से अपने खिलाफ टिप्पणियां हटाने और ब्लैकलिस्टिंग वाले आदेश को वापस लेने की गुहार लगाई थी।

ये है मामला 

एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पुस्तक Exploring Society: India and Beyond के अध्याय चार में न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा करते हुए ‘भ्रष्टाचार’ और ‘बैकलॉग’ जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और इसे न्यायपालिका की गरिमा पर हमला बताया था। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पुस्तक पर रोक लगाई, पूरे संस्करण को वापस लेने का आदेश दिया और लेखकों पर सख्त टिप्पणियां की थीं। इस प्रकरण में एनसीईआरटी ने पहले ही बिना शर्त माफी मांगी थी और पूरी पुस्तक बाजार से वापस ले ली थी।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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