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पंजाब सीएम भगवंत मान ने लुधियाना में टाटा स्टील प्लांट का किया उद्घाटन, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार

Written by:Shyam Dwivedi
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लुधियाना में टाटा स्टील के अत्याधुनिक हरित इस्पात संयंत्र का उद्घाटन किया है। 3,200 करोड़ रुपये के इस निवेश से 2,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने और राज्य को सालाना 300 करोड़ तक का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। यह प्लांट स्क्रैप आधारित तकनीक पर काम करेगा।
पंजाब सीएम भगवंत मान ने लुधियाना में टाटा स्टील प्लांट का किया उद्घाटन, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार

लुधियाना: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य को औद्योगिक विकास की राह पर आगे बढ़ाते हुए लुधियाना में टाटा स्टील के अत्याधुनिक हरित इस्पात संयंत्र का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस प्लांट के शुरू होने से पंजाब अब हरित इस्पात का उत्पादन करने वाला पहला राज्य बन गया है। यह संयंत्र लुधियाना की हाई-टेक वैली में लगभग 115 एकड़ भूमि पर स्थित है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा स्टील ने इस प्लांट की स्थापना पर 3,200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 2,500 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह भारत में टाटा स्टील का दूसरा रीसाइक्लिंग आधारित ग्रीन स्टील प्लांट है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार को सालाना 300 करोड़ के राजस्व की उम्मीद

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि इस संयंत्र के चालू होने से राज्य सरकार को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। अनुमान है कि जीएसटी, बिजली की खपत, स्टांप शुल्क और अन्य करों के माध्यम से पंजाब को हर साल 200 से 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा, प्लांट के आसपास सहायक उद्योगों और एमएसएमई के विकास से आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिलेगा।

“यह गुरुओं की भूमि है। चाहे कोई गली-मोहल्ले का विक्रेता हो या टाटा, पंजाब में किसी को भी नुकसान नहीं है। हमारा मकसद युवाओं को नशे के जाल से मुक्त कराना और उन्हें रोजगार देना है।”- भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

कैसे काम करेगा यह ग्रीन स्टील प्लांट?

यह संयंत्र पारंपरिक इस्पात उत्पादन प्रक्रियाओं से बिल्कुल अलग है। यह ‘हरित इस्पात’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम रखा जाता है।

मुख्य विशेषताएं:

इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) तकनीक: प्लांट में कोयले के बजाय बिजली का उपयोग करके स्क्रैप (कबाड़) को पिघलाया जाएगा और उससे नया इस्पात तैयार होगा। इससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।

कम पानी की खपत: पारंपरिक इस्पात संयंत्रों की तुलना में इसमें पानी की खपत काफी कम होगी, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाता है।

ऊर्जा दक्षता: प्लांट में ऊर्जा-कुशल प्रणालियां लगाई गई हैं, जिससे परिचालन लागत भी कम रहेगी।

स्वचालित संचालन: इसे विश्व स्तरीय मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और इसमें डिजिटल व स्वचालित संचालन प्रणाली होगी, जिससे मैन्युअल हस्तक्षेप न के बराबर होगा।

इस प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 0.75 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) होगी। यह मुख्य रूप से निर्माण क्षेत्र के लिए टीएमटी बार और अन्य इस्पात उत्पादों का निर्माण करेगा। कार्यक्रम के दौरान टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखर ने यह भी जानकारी दी कि हलवारा से दिल्ली के लिए फ्लाइट बुकिंग अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगी।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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