पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक सुनवाई केंद्र पर हिंसा भड़काने के आरोपों का सामना कर रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक मनीरुल इस्लाम अब बैकफुट पर आ गए हैं। चुनाव आयोग (EC) द्वारा उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश के बाद, विधायक ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को एक पत्र लिखकर अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा है कि उनका इरादा प्रक्रिया को बाधित करने का नहीं था और वह संविधान व चुनाव आयोग का बहुत सम्मान करते हैं।
फरक्का से विधायक मनीरुल इस्लाम का यह पत्र ठीक उस समय आया है, जब जिला प्रशासन उन पर एसआईआर सुनवाई केंद्र में तोड़फोड़ और अधिकारियों को धमकी देने के आरोपों के तहत कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
पत्र में दी सफाई, कहा- संविधान का पालन करता हूं
शुक्रवार शाम को ERO को भेजे गए पत्र में इस्लाम ने कहा कि वह कानून के शासन में विश्वास रखते हैं और हमेशा संविधान का पालन करते हैं। उन्होंने 14 जनवरी को फरक्का ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन पर अपनी टिप्पणियों का भी जिक्र किया।
विधायक ने लिखा, ‘उस दिन की गई मेरी टिप्पणियां जनमत की अभिव्यक्ति थीं। इनका मकसद चुनाव आयोग के अधिकार को कमजोर करना या चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना बिल्कुल नहीं था।’
“शब्दों के चयन में कोई भी चूक अनजाने में हुई थी। मेरी टिप्पणियों में कोई दुर्भावना, उकसावा या कानून के उल्लंघन का प्रयास नहीं था।” — मनीरुल इस्लाम, TMC विधायक
इस्लाम ने आगे कहा कि अगर किसी ने उनकी बातों का गलत मतलब निकाला है, तो यह सही नहीं है। उन्होंने प्रशासन और चुनाव आयोग को पूरा सहयोग करने का आश्वासन देते हुए कहा कि वह सभी कानूनी निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार हैं।
क्या है 14 जनवरी का पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 14 जनवरी को फरक्का BDO कार्यालय में हुई एक घटना से जुड़ा है। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कुछ बूथ स्तर के अधिकारियों के विरोध के बाद वहां हिंसा भड़क गई थी। घटना के तुरंत बाद, विधायक मनीरुल इस्लाम अपने समर्थकों के साथ कार्यालय परिसर में घुस गए और एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग करने लगे।
अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान कार्यालय में रखी प्लास्टिक की कुर्सियों और अन्य फर्नीचर में तोड़फोड़ की गई। कार्यालय के बाहर खड़े होकर इस्लाम ने एसआईआर प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि लोगों के नाम के आधार पर उनसे अलग-अलग दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वह ऐसे ‘दोहरे मापदंडों’ का विरोध करेंगे और इसके लिए ‘गोली खाने’ को भी तैयार हैं। इसी घटना के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।





