नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में SIR (संभवतः मतदाता सूची से संबंधित) को लेकर चुनाव आयोग के साथ बढ़ते टकराव के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अब एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। TMC का आरोप है कि CEC भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारों पर काम कर रहे हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।
TMC सूत्रों के मुताबिक, बजट सत्र के दूसरे हिस्से में ही इस प्रस्ताव को सदन में पेश करने की योजना है। इसके लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और जल्द ही जरूरी संख्या से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, पार्टी ने अभी यह तय नहीं किया है कि इस प्रस्ताव को लोकसभा में पेश किया जाएगा या राज्यसभा में।
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विपक्ष को साधने की रणनीति
दिलचस्प बात यह है कि TMC यह कदम बजट सत्र के पहले चरण में ही उठाना चाहती थी, लेकिन उस वक्त कांग्रेस की प्राथमिकता स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की थी। इसी वजह से दोनों दलों में सहमति नहीं बन पाई और TMC ने स्पीकर के खिलाफ लाए जाने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं। TMC ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का साथ देने का फैसला किया है। इसके बदले में, सूत्रों का कहना है कि विपक्ष भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर मौखिक रूप से सहमत हो गया है। इसी सहमति के आधार पर TMC अब पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।
ममता बनर्जी लगातार हमलावर
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी शुरुआत से ही SIR की घोषणा को लेकर चुनाव आयोग और विशेषकर CEC ज्ञानेश कुमार पर हमलावर रही हैं। उन्होंने कई मौकों पर आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग का भाजपा गलत इस्तेमाल कर रही है।
“भाजपा सुनियोजित तरीके से हर लोकतांत्रिक संस्था और संवैधानिक पद का दुरूपयोग कर रही है ताकि वह अपनी जन-विरोधी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सके।”- ममता बनर्जी
SIR की फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद ममता ने कहा था कि मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाए जा रहे हैं, जो कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।
कोलकाता में CEC का विरोध
यह राजनीतिक घमासान उस वक्त और तेज हो गया जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए रविवार को कोलकाता पहुंचे। अपने तीन दिवसीय दौरे के लिए कोलकाता पहुंचने पर उन्हें कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह घटना दिखाती है कि बंगाल में चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल के बीच तनाव चरम पर है।