देहरादून: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में संपन्न हुए बजट सत्र के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आज देहरादून में कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेसवार्ता कर धामी सरकार पर कई गंभीर आरोप जड़े। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन से लेकर कीमती सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रचने तक के आरोप लगाए।

कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से कहा कि गैरसैंण में आयोजित बजट सत्र केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया, जिसमें जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचा गया। आर्य ने इस बात पर आपत्ति जताई कि राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही बजट पेश कर दिया गया, जो स्थापित संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

बजट पर चर्चा के दौरान खाली रहा सदन

नेता प्रतिपक्ष ने बजट चर्चा के दौरान सदन में मंत्रियों और सत्ता पक्ष के विधायकों की कम उपस्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह रवैया जनता के प्रति सरकार की गैर-जिम्मेदाराना सोच को दर्शाता है।

“जब प्रदेश के 1.11 लाख करोड़ के बजट पर चर्चा हो रही थी, तब सदन से मंत्रियों और भाजपा विधायकों का गायब रहना यह दिखाता है कि वे जनता के मुद्दों के प्रति कितने असंवेदनशील हैं।”- यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष

कांग्रेस ने यह भी कहा कि सरकार केवल अपना एजेंडा चलाने में व्यस्त रही और बेरोजगारी, महंगाई व पलायन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विपक्ष को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

सरकारी जमीनें निजी हाथों में सौंपने का गंभीर आरोप

प्रेसवार्ता के दौरान यशपाल आर्य ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विकासनगर, मसूरी और देहरादून की यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी एवं सिंचाई विभाग की करोड़ों रुपये की कीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे एक बड़ा घोटाला होने की आशंका जताई और कहा कि कांग्रेस इस तरह के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध करेगी।

बढ़ता कर्ज, घटती जवाबदेही

विपक्ष ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1.11 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ ही राज्य पर कर्ज का बोझ भी बढ़कर लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश कर्ज में डूबा है, तो सरकार फिजूलखर्ची और अपने एजेंडे पर क्यों ध्यान केंद्रित कर रही है।