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Sat, Jan 10, 2026

विश्व हिंदी दिवस: जानिए क्या अंतर है ‘विश्व हिंदी दिवस’ और ‘हिंदी दिवस’ में, इस साल की थीम है भाषा और डिजिटल तकनीक का संगम

Written by:Shruty Kushwaha
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समय के साथ आगे बढ़ना और नई तकनीकों को अपनाना ज़रूरी है। और ये बात भाषा पर भी लागू होती है। विश्व हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हिंदी की जड़ें बहुत गहरी और पारंपरिक है, लेकिन उसकी दृष्टि भविष्य पर टिकी है। आज हिंदी भाषा पुस्तकों और सभागारों की सीमाओं से निकलकर स्क्रीन, मोबाइल ऐप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक मंचों तक अपनी प्रभावशाली मौजूदगी दर्ज करा रही है।
विश्व हिंदी दिवस: जानिए क्या अंतर है ‘विश्व हिंदी दिवस’ और ‘हिंदी दिवस’ में, इस साल की थीम है भाषा और डिजिटल तकनीक का संगम

World Hindi Day

आज दुनियाभर में ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया जा रहा है। यह दिन हिंदी भाषा की वैश्विक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। बदलते समय और संदर्भ में देखें तो आज के डिजिटल युग ने हिंदी भाषा को अभिव्यक्ति का एक नया और व्यापक मंच प्रदान किया है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के प्रसार के साथ हिंदी अब सिर्फ बोलचाल या साहित्य की भाषा नहीं रही, बल्कि तकनीक, सूचना और वैश्विक संवाद की भी प्रमुख भाषा बनती जा रही है।

आज के दिन सीएम डॉ मोहन यादव ने सभी को विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्होंने लिखा है कि ‘हिन्दी हमारे लिए भाषा के साथ देश के गौरवशाली इतिहास व परंपराओं की अविरल धारा है और जुड़ाव का अप्रतिम माध्यम है। विश्वस्तर पर हिन्दी को समृद्ध करने वाले सभी साहित्य साधकों को नमन करता हूं।’

उत्साह से मनाया जा रहा है ‘विश्व हिंदी दिवस’ 

विश्व हिंदी दिवस की जड़ें 10 जनवरी 1975 में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन तक जाती हैं, जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था और उस सम्मेलन में तीस से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस ऐतिहासिक सम्मेलन की स्मृति में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरु हुई। वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस दिन को औपचारिक रूप से हर साल अंतर्राष्ट्रीय विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

क्या है ‘विश्व हिंदी दिवस’ और ‘हिंदी दिवस’ में अंतर

हालांकि भारत में हर वर्ष 14 सितंबर ‘हिंदी दिवस’ भी मनाया जाता है। लेकिन ‘हिंदी दिवस’ और ‘विश्व हिंदी दिवस’ में अंतर है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। केंद्र सरकार ने 1953 से 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाने की पहल की। इसके बाद से उस दिन की स्मृति में हमारे देश में ‘हिंदी दिवस’ उत्साह के साथ मनाया जाता है। वहीं, ‘विश्व हिंदी दिवस’ विश्व हिंदी सम्मेलन की स्मृति को समर्पित है और हिंदी भाषा से जुड़े लोग व संस्थाएं इसे दुनियाभर में मनाती हैं।

इस साल की थीम जो जोड़ती है नई तकनीक से

इस वर्ष ‘विश्व हिंदी दिवस’ की थीम “हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक” है। हिंदी अब सिर्फ पारंपरिक साहित्य, संस्कृति और भावनाओं की भाषा नहीं रही बल्कि आधुनिक डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, वॉयस असिस्टेंट, ट्रांसलेशन टूल्स और तकनीकी प्लेटफॉर्म्स में भी तेजी से अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। हम देख रहे हैं कि सोशल मीडिया, यूट्यूब, पॉडकास्ट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी कंटेंट की लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।इस बार की थीम हिंदी की समृद्ध विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़कर दिखाती है और यह संदेश देती है कि हिंदी भविष्य की भाषा भी बन रही है।