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यमुनोत्री से भाई के साथ विदा हुई माता यमुना की डोली, 6 महीने के लिए बंद हुए धाम के कपाट

Written by:Diksha Bhanupriy
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सर्दियों का मौसम शुरू होते ही एक-एक करके चारों धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसी बीच केदारनाथ और गंगोत्री के बाद यमुनोत्री के कपाट भी आज दोपहर बंद कर दिए गए।
यमुनोत्री से भाई के साथ विदा हुई माता यमुना की डोली, 6 महीने के लिए बंद हुए धाम के कपाट

चारों धामों में से एक विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम (Yamunotri Dham) के कपाट भाई दूज की मात्रा 6 महीने के लिए बंद कर दिए गए। आज आखिरी दिन पर विशेष पूजन पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के बाद दोपहर 12:30 पट शीतकाल के लिए बंद किए गए हैं। धाम के द्वारा बंद होने से पहले हर्षाली से शनि समेश्वर देवता की डोली गाजे बाजे के साथ अपनी बहन के धाम पहुंची।

जब शनि समेश्वर की डोली यमुनोत्री पहुंची। उसके बाद इसे कपाट बंदी की विशेष पूजा में शामिल किया गया। सारी पूजा संपन्न होने के बाद मां यमुना अपने भाई की डोली के साथ शीतकालीन प्रवास खरसाली के लिए रवाना हुईं।

बंद हुए यमुनोत्री के कपाट (Yamunotri Dham)

बता दें कि यमुनोत्री हिमालय में समुद्र तल से 3293 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। 30 अप्रैल को यहां के द्वार भक्तों के दर्शन के लिए खोले गए थे। धाम बंद होने तक यहां लगभग 6.44 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन लिए। मंदिर में विशेष पूजन अर्चन के उपरांत दोपहर 12:30 पर कपाट बंद करने की प्रक्रिया को पूरा किया गया।

कपाट बंद होने से पहले पहुंचे शनिदेव की डोली

कपाट बंद होने की पूजा संपन्न होने से पहले खरसाली गांव से शनि देव महाराज की डोली वाद्य यंत्रों की ध्वनि के साथ यमुनोत्री पहुंची। धाम पर पहुंचने के बाद शनि देव महाराज को यमुना नदी में स्नान करवाया गया और वह अपनी बहन के साथ विशेष पूजन में सम्मिलित हुए। इस दौरान पूरा धाम माता यमुना के जयकारों से गूंज उठा। अब जब माता की डोली खरसाली पहुंचेगी तब गांववासी भक्ति भाव से उनका स्वागत करेंगे। 6 महीने तक माता भक्तों को यहां दर्शन देंगी।

केदारनाथ के कपाट भी बंद

आज भाई दूज के दिन सुबह 8:30 पर केदारनाथ मंदिर के कपाट 6 महीने के लिए यानी पूरे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सुबह 6:00 बजे गर्भ गृह के कपाट बंद किए गए इसके बाद 8:30 पर मुख्य द्वार को बंद किया गया। अब 6 महीने बाबा भक्तों को ऊखीमठ में दर्शन देंगे।

केदारनाथ के कपाट बंद होने से पहले यहां पर विशेष समाधि पूजा की जाती है। यह बहुत ही खास पूजा है जो गोपनीय तरीके से कई घंटे तक की जाती है। यह अंतिम पूजा होती है,जिसमें मंदिर के मुख्य पुजारी महादेव का विशेष तरीके से श्रृंगार करते हैं। इस श्रृंगार में शिवलिंग को फूल, भस्म और विभिन्न अनाजों के लेप से समाधिस्थ रूप दिया जाता है। महादेव की शिवलिंग को इस तरह से ढका जाता है जैसे वो 6 महीने के लिए समाधि में चले गए हैं।

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Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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