Hindi News

UGC के प्रस्तावित बिल पर ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त ने उठाए सवाल, कहा- यह सामाजिक विभाजन की खाई को और गहरा करेगा

Written by:Banshika Sharma
Published:
Last Updated:
ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) से जुड़े एक प्रस्तावित बिल पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह बिल सामाजिक विभाजन को बढ़ा सकता है और 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना के खिलाफ है।
UGC के प्रस्तावित बिल पर ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त ने उठाए सवाल, कहा- यह सामाजिक विभाजन की खाई को और गहरा करेगा

नई दिल्ली। ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने शिक्षा और सामाजिक समानता से जुड़े एक अहम मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के एक प्रस्तावित बिल पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे देश के भविष्य के लिए घातक बताया है। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उन्होंने इस बिल को सामाजिक विभाजन बढ़ाने वाला और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया है।

संविधान और समानता का दिया हवाला

योगेश्वर दत्त ने अपने बयान की शुरुआत भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान देश के सभी वर्गों, जातियों और नागरिकों को समानता और सुरक्षा का अधिकार देता है। उन्होंने लिखा कि मौलिक समानता का यह अधिकार हर भारतवासी का है, जिसकी रक्षा हमारे पूर्वजों ने बड़े त्याग और बलिदान से की है।

बच्चों के भविष्य पर जताई चिंता

उन्होंने शिक्षा के स्तर पर बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव पर चिंता व्यक्त की। दत्त के अनुसार, किशोरावस्था में ही बच्चों के भविष्य को बिना सुनवाई और समानता के अंधकार में धकेलना देश के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए एक सुरक्षित भविष्य और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना न केवल हमारा कर्तव्य है, बल्कि इसी में राष्ट्र का वास्तविक हित भी है।

‘सामाजिक विभाजन की खाई गहरी होगी’

योगेश्वर दत्त ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि UGC से जुड़ा यह प्रस्तावित बिल समाज में आपसी विभाजन की खाई को और गहरा कर सकता है। उन्होंने कहा कि देश पहले ही अतीत में लिए गए कुछ गलत निर्णयों के दुष्परिणाम भुगत रहा है। दत्त ने कहा, “संवेदनशील मुद्दों पर लिए गए ऐसे फैसले देश को गलत दिशा में ले जा सकते हैं।”

उन्होंने अपने बयान का अंत ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना का उल्लेख करते हुए किया। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए इस तरह के नियम उचित नहीं हैं। उनका यह बयान उस समय आया है जब देश भर में शिक्षा नीति से जुड़े कई विषयों पर व्यापक चर्चा हो रही है।