Hindi News

जावद में तकनीकी क्रांति: सरकारी स्कूल के बच्चे बने ‘टेक-स्मार्ट’, AI से रच रहे नया इतिहास, आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ाये कदम

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
Published:
सबसे खास बात यह है कि बच्चे सिर्फ तकनीक सीख ही नहीं रहे हैं, बल्कि 'लर्न एंड अर्न' (सीखो और कमाओ) की तर्ज पर लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करके आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं।
जावद में तकनीकी क्रांति: सरकारी स्कूल के बच्चे बने ‘टेक-स्मार्ट’, AI से रच रहे नया इतिहास, आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ाये कदम

Jawad MLA Om Prakash Saklecha

आमतौर पर जब सरकारी स्कूलों का जिक्र होता है, तो जेहन में सुविधाओं के अभाव और पिछड़ेपन की तस्वीर उभरती है। लेकिन जावद विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में एक खामोश और सशक्त तकनीकी क्रांति जन्म ले रही है। कल तक जिन बच्चों के हाथ कंप्यूटर का माउस पकड़ने में कांपते थे, आज वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और वीडियो एडिटिंग जैसे अत्याधुनिक टूल्स पर फर्राटे से काम कर रहे हैं।

जावद क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में स्थानीय विधायक ओमप्रकाश सखलेचा की दूरगामी सोच के परिणामस्वरूप चल रहे ‘डीप आईटी (Deep IT) कोर्स’ ने इन ग्रामीण प्रतिभाओं को वो पंख दिए हैं, जिससे वे अब सीधे आसमान छू रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि बच्चे सिर्फ तकनीक सीख ही नहीं रहे हैं, बल्कि ‘लर्न एंड अर्न’ (सीखो और कमाओ) की तर्ज पर लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करके आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं।

मशीन लर्निंग और वीडियो एडिटिंग से कर रहे कमाई

यह कोर्स महज किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। जावद विधानसभा क्षेत्र के 11 शासकीय और सांदीपनि विद्यालयों (जिनमें जावद, अठाना, जाट, सरौंदा, सिंगोली, कोज्या, खोर और डीकेन शामिल हैं) के आंकड़े बेहद उत्साहवर्धक हैं। इन स्कूलों के छात्रों को कुल 28 प्रोजेक्ट्स आवंटित किए गए हैं, जिनके तहत उन्हें 336 तकनीकी फाइलें तैयार करनी हैं। इसमें सबसे अधिक 10 प्रोजेक्ट (120 फाइलें) सांदीपनि गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, सिंगोली के छात्रों को मिले हैं। बच्चे ‘बेसिक्स ऑफ मशीन लर्निंग’, ‘विंडोज 11’ और ‘वीडियो एडिटिंग’ जैसे एडवांस प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं और इसके जरिए अब तक 14,000 रुपये की कमाई कर चुके हैं। एक ही वीडियो एडिटिंग प्रोजेक्ट से अधिकतम 5,000 रुपये तक कमाए गए हैं। यह उड़ान साबित करती है कि यदि अवसर मिले, तो सरकारी स्कूल के बच्चे किसी भी बड़े निजी स्कूल के छात्रों को पीछे छोड़ सकते हैं।

पहले माउस पकड़ने से डरते थे, आज किसानों के लिए प्रोजेक्ट बना रहे 

इस मार्मिक और प्रेरणादायी यात्रा को इन होनहार छात्रों ने अपने ही शब्दों में कुछ इस तरह बयां किया, एकीकृत हाई स्कूल, तारापुर के छात्र प्रद्युम्न ने बताया कि पहले मुझे कंप्यूटर का माउस पकड़ने में भी डर लगता था। लेकिन अब मेरे अंदर गजब का आत्मविश्वास आ गया है। मैंने टाइपिंग, माइक्रोसॉफ्ट से लेकर चैटजीपीटी, कैनवा और भाषिणी जैसे एआई टूल्स सीखे हैं। मैंने चैटजीपीटी की मदद से किसानों की भलाई के लिए एक पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया है। आज मैं खुद अपना रेज़्यूमे और कवर लेटर बना सकता हूँ।”

साइबर ठगी से बचाने के लिए एआई से बनाए पोस्टर

एकीकृत हाई स्कूल, तारापुर की 10वीं छात्रा नंदिनी ने कहा कि आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी बहुत बढ़ गई है। मैंने चैटजीपीटी से ऑनलाइन सुरक्षा के 8 सबसे अहम नियम पूछे। उसने मुझे बहुत अच्छी तरह समझाया। फिर मैंने कैनवा ऐप का उपयोग करके उन नियमों का एक आकर्षक पोस्टर बनाया और उसे अपने परिवार, दोस्तों और स्कूल के ग्रुप में शेयर किया ताकि कोई भी ठगी का शिकार न हो।

अपने गाँव और स्कूल की कविता को एआई से मधुर गीत में बदला

एकीकृत हाई स्कूल, तारापुर की 10वीं छात्रा गुनगुन गंगवाल ने बताया कि मैंने चैटजीपीटी में अपने गाँव, स्कूल और यहाँ की छोटी-छोटी जानकारियाँ डालीं और एक कविता बनाने को कहा। जब कविता बन गई, तो मैंने ‘सुनो एआई’ (Suno AI) ऐप में जाकर उसे एक महिला की आवाज़ में एक बेहद खूबसूरत गाने में बदल दिया। जब मैंने वह गाना सबको सुनाया, तो सब हैरान रह गए।

रास्ते में कचरा देखा, तो एआई से बना डाला स्वच्छता पर गाना

शासकीय हाई स्कूल, बराड़ा के 9वीं के छात्र, सुरेश ने अनुभव बताते हुए कहा कि  मैं जब भी आता-जाता था, तो रास्ते में कूड़ा-कचरा देखकर सोचता था कि लोग जागरूक क्यों नहीं हैं। मैंने चैटजीपीटी को प्रॉम्प्ट दिया और उसने मुझे स्वच्छता पर बहुत अच्छे लिरिक्स लिखकर दिए। फिर मैंने उसे सुनो एआई में डालकर एक बेहतरीन गाना तैयार किया। मुझे लगता है कि इस गाने से लोग स्वच्छता के प्रति जरूर जागरूक होंगे।

डेयरी फार्मिंग को एआई वीडियो से दी नई पहचान

शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जावद के 9वीं के छात्र दीपक प्रजापति ने कहा कि हमारे गाँव में पहले सिर्फ खेती होती थी, लेकिन अब डेयरी फार्मिंग भी हो रही है। 26 जनवरी के एक प्रोजेक्ट के लिए मैंने एआई टूल ‘नोटबुक एलएम’ (Notebook LM) और चैटजीपीटी की मदद से अपने गाँव के डेयरी फार्म पर एक शानदार वीडियो स्टोरी बनाई और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया है, ताकि लोगों का बिज़नेस बढ़ सके।

विधायक सकलेचा ने आत्मनिर्भर बनने का लिया वादा  

जावद विधानसभा में इस तकनीकी क्रांति के पीछे का सोच विधायक ओम प्रकास सकलेचा की है, उन्होंने अपनी विधानसभा के सरकारी स्कूलों में बच्चों की आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम को चलाया है वे समय समय पर स्कूलों में जाकर निरीक्षण करते हैं, एक अभिभावक की तरह विद्यार्थियों से उनकी प्रगति पूछते हैं, उन्होंने वादा लिया है कि स्कूल में जितना सीखना हो सीखो और 18 साल की उम्र तक माता पिता के मददगार बनना है बेरोजगार नहीं बनना है,  सभी छात्रों ने एक स्वर में इस तकनीकी ज्ञान और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए विधायक ओमप्रकाश सखलेचा का आभार व्यक्त किया है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
Follow Us :GoogleNews