नीमच: मध्य प्रदेश के मनासा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम का इस्तेमाल कर एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को प्रमोट करने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। एक वायरल तस्वीर के आधार पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि ‘खाटू धाम कॉलोनी’ के भव्य शुभारंभ के लिए आयोजकों ने मुख्यमंत्री के नकली भतीजे को मुख्य अतिथि बना दिया था। इस मामले में दो कॉलोनाइजरों से पूछताछ की गई है।
मामला मनासा तहसील का है, जहां मंदसौर के कॉलोनाइजर कोमल बाफना और हरीश विजयवर्गीय ने अपनी नई कॉलोनी के लिए एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन 6 से 8 फरवरी तक चला, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे की घोषणा की गई थी। इलाके में बड़े-बड़े बैनर लगाकर प्रचार किया गया कि मुख्यमंत्री के भाई नारायण यादव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।

भव्य आयोजन और झूठे वादे
आयोजकों ने पूरे क्षेत्र में यह संदेश फैलाया कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री परिवार की मौजूदगी रहेगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आकर्षित हों और प्रोजेक्ट में निवेश करें। जब पहले दो दिन मुख्यमंत्री के भाई नारायण यादव नहीं पहुंचे, तो आयोजकों ने भीड़ के सामने घोषणा कर दी कि उनकी जगह उनके बेटे अभय यादव कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
मंच पर पहुंचा ‘नकली’ अभय यादव
कार्यक्रम के आखिरी दिन, 8 फरवरी को एक अज्ञात युवक को मुख्यमंत्री का भतीजा ‘अभय यादव’ बताकर मंच पर लाया गया। उसका भव्य स्वागत हुआ। मालाएं पहनाई गईं, शॉल ओढ़ाई गई और स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद मामला पुलिस की नजर में आया।

एक तस्वीर से हुआ भंडाफोड़
जब वायरल तस्वीर मनासा पुलिस के पास पहुंची, तो थाना प्रभारी ने इसकी पुष्टि के लिए मुख्यमंत्री के असली भतीजे अभय यादव से संपर्क किया। अभय यादव ने बताया कि वह उस दिन ग्वालियर में थे और उन्हें इस कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस एक फोन कॉल ने पूरे ड्रामे का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस ने तुरंत कॉलोनाइजर कोमल बाफना और हरीश विजयवर्गीय को थाने बुलाकर पूछताछ की। जब उनसे अतिथि की पुष्टि और कार्यक्रम की अनुमति के बारे में सवाल किए गए, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। बाद में दोनों ने एक लिखित माफीनामा दिया, जिसमें कहा गया कि उन्हें किसी ने गलत जानकारी दी थी। फिलहाल पुलिस उस व्यक्ति की तलाश कर रही है, जिसने खुद को अभय यादव बताकर कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह जांच का विषय है कि यह केवल एक लापरवाही थी या व्यावसायिक लाभ के लिए सत्ता की निकटता दिखाने की एक सोची-समझी साजिश।






