नीमच: मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और धांधली के कई मामले सामने आ रहे हैं। जिसको लेकर कर्मचारी एवं अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जा रही है। वहीं नीमच में राजस्व विभाग में भी बड़ी लापरवाही एवं धांधली का ताजा मामला सामने आया है। जावद के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने शासकीय भूमि के पट्टाधारी अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों के नाम बिना अनुमति के भू-अभिलेख पोर्टल से हटाए जाने के मामले में सख्त कार्रवाई की है। मामले में दोषी पाए गए एक पटवारी का आगामी दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि जांच में पाया गया कि तत्कालीन पटवारी हल्का क्रमांक-26 (रूपपुरा) एवं वर्तमान पटवारी हल्का क्रमांक-08 (मेलानखेड़ा) योगेन्द्र श्रीवास्तव ने आदिवासियों को जारी पट्टे की भूमि के रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी की है। आरोप है कि उन्होंने बिना सक्षम अनुमति या वैधानिक आदेश के भू-अभिलेख पोर्टल से पट्टाधारियों के नाम हटा दिए और उनके स्थान पर अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिए। जिसके बाद इस मामले में विभागीय जांच की गई एवं कार्रवाई की गई।
नोटिस के बावजूद नहीं मिला संतोषजनक जवाब
इस मामले में तहसीलदार जावद ने 13 अप्रैल 2026 को अपनी जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। इतना ही नहीं इससे पहले 26 फरवरी 2026 को पटवारी योगेन्द्र श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस की सूचना मिलने के बावजूद उन्होंने निर्धारित समय में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद 21 अप्रैल 2026 को उन्हें दोबारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जिसके बाद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर योगेन्द्र श्रीवास्तव ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। लेकिन विभाग ने उसे असंतोषजनक माना एवं आगे की कार्रवाई की गई।
मामले में पटवारी पर हुई सख्त कार्रवाई
बता दें कि इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 10(4) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। जावद के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने 11 मई 2026 को आदेश जारी कर पटवारी योगेन्द्र श्रीवास्तव की आगामी दो साल तक की वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया है।






