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नीमच: भीषण जल संकट से परेशान महिलाओं का फूटा गुस्सा, महू रोड पर किया चक्काजाम

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
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आक्रोशित महिलाएं घरों से बाहर निकल कर मुख्य मार्ग पर एकत्रित हो गईं। उन्होंने हाथों में हाथ डालकर सड़क को पूरी तरह से घेर लिया और यातायात बाधित कर दिया। प्रदर्शन स्थल पर रखे खाली मटके प्रशासन की जल वितरण व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
नीमच: भीषण जल संकट से परेशान महिलाओं का फूटा गुस्सा, महू रोड पर किया चक्काजाम

Neemuch women’s road blockade

नीमच शहर में गहराते जल संकट के कारण स्थानीय लोगों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। पानी की भारी किल्लत से परेशान होकर महिलाओं का सब्र आखिर टूट गया और उन्होंने महू रोड पर चक्काजाम कर दिया, विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं का गंभीर आरोप है कि उनके क्षेत्र में पिछले 10 दिनों से नल से पानी नहीं आया है।

आक्रोशित महिलाओं ने कहा इस भीषण गर्मी के मौसम में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप होने से दैनिक काम-काज बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं और लोग पीने के पानी तक को मोहताज हैं। प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरन महिलाओं को यह कदम उठाना पड़ा।

खाली मटके लेकर सड़क पर उतरीं महिलाएं

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि आक्रोशित महिलाएं घरों से बाहर निकल कर मुख्य मार्ग पर एकत्रित हो गईं। उन्होंने हाथों में हाथ डालकर सड़क को पूरी तरह से घेर लिया और यातायात बाधित कर दिया। प्रदर्शन स्थल पर रखे खाली मटके प्रशासन की जल वितरण व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।

यातायात हुआ प्रभावित

महिलाओं के इस चक्काजाम के कारण महू रोड पर वाहनों की आवाजाही रुक गई और दुपहिया तथा चार पहिया वाहनों की कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जब तक प्रशासन द्वारा पानी की नियमित और सुचारू आपूर्ति का ठोस आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगी।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर इन प्यासी और परेशान महिलाओं की समस्या का कितनी जल्दी समाधान निकालते हैं।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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