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सौर ऊर्जा प्लांट में सुरक्षाकर्मी हादसे का शिकार, अस्पताल ने मांगे लाखों रुपये, कंपनी ने झाड़ा पल्ला, साथी श्रमिक धरने पर

Written by:Atul Saxena
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परिजनों का कहना है कि एक्सीडेंट के बाद भी कंपनी का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी घायल का हाल जानने के लिए नहीं आया, अस्पताल वाले 6 लाख रुपये मांग रहे हैं हम कहाँ से देंगे, परिजनों ने आर्थिक मदद की गुहार लगाई है ।
सौर ऊर्जा प्लांट में सुरक्षाकर्मी हादसे का शिकार, अस्पताल ने मांगे लाखों रुपये, कंपनी ने झाड़ा पल्ला, साथी श्रमिक धरने पर

नीमच जिले के सिंगोली थाना क्षेत्र के बड़ी गांव स्थित सौर ऊर्जा प्लांट में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था और कंपनियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार थडोद निवासी सुरक्षाकर्मी लोकेश पिता राजेंद्र सुतार मंगलवार रात करीब 9 बजे सड़क पर ड्यूटी करते समय एक्सीडेंट का शिकार हो गया। हादसे में लोकेश गंभीर रूप से घायल हो गया।

घायल सुरक्षाकर्मी को पहले सिंगोली से भीलवाड़ा रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन के लिए 6 लाख रुपए की मांग रखी। परिजनों का आरोप है कि हादसे की सूचना मिलने के बाद भी न तो ऊर्जा कंपनी और न ही सुरक्षा कंपनी का कोई जिम्मेदार मौके पर पहुंचा और न ही किसी प्रकार की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई।

आक्रोशित परिजन, साथी श्रमिक धरने पर 

इस लापरवाही से आक्रोशित परिजन और साथी सुरक्षाकर्मी बुधवार सुबह से ही सौर ऊर्जा प्लांट गेट पर धरने पर बैठ गए। पीड़ित की मां ने कहा कि बेटे की हालत नाजुक है, लेकिन कंपनी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से न्याय और उपचार की व्यवस्था की मांग की।

तहसीलदार धरना स्थल पर  

वहीं मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों से चर्चा शुरू की है। धरने पर बैठे  साथी श्रमिकों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि घायल की आर्थिक सहायता और उचित इलाज की व्यवस्था नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा।

नीमच से कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट  

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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