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मरीज की मौत पर बवाल: परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप, अस्पताल प्रबंधन ने दावों को बताया बेबुनियाद

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
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शहर में एक मरीज की मौत के बाद जिला चिकित्सालय परिसर में परिजनों द्वारा हंगामे का मामला सामने आया है। परिजनों ने सरकारी अस्पताल और निजी अस्पताल की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए आयुष्मान कार्ड के बावजूद लाखों रुपये वसूलने के आरोप लगाये हैं।
मरीज की मौत पर बवाल: परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप, अस्पताल प्रबंधन ने दावों को बताया बेबुनियाद

Patient dies family members ruckus

नीमच शहर में एक सड़क हादसे में घायल मरीज की मौत के बाद भारी बवाल मच गया। आक्रोशित परिजनों ने जिला चिकित्सालय परिसर में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही बरतने और आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मनमाने पैसे वसूलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, इस मामले में निजी अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को तथ्यहीन और भ्रामक बताया है।

जानकारी के मुताबिक 2 मार्च 2026 की रात भगवानपुरा चौराहा इंदिरा नगर क्षेत्र में सुधीर चौहान को एक गाय ने जोरदार टक्कर मार दी थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायल अवस्था में उन्हें शहर के ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में ले जाया गया। यहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मरीज की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने जिला चिकित्सालय परिसर में जमकर नारेबाजी और हंगामा किया।

परिजनों का आरोप, आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी वसूले लाखों रुपये 

परिजनों का आरोप है कि सरकारी और निजी अस्पतालों की मिलीभगत चल रही है। उनका दावा है कि मरीज के पास ‘आयुष्मान कार्ड’ होने के बावजूद अस्पताल द्वारा उनसे लाखों रुपये की वसूली की गई और सही समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण मरीज की जान गई।

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष: “इलाज में नहीं हुई कोई कोताही”

हंगामे के बाद ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंधन की ओर से अभिनव चौरसिया ने सामने आकर परिजनों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि मरीज को रात करीब 9:38 बजे अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में लाया गया था। उस समय मरीज पूरी तरह से अचेत था, शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी, आंखों की पुतलियां फैली हुई थीं और कान से खून का रिसाव हो रहा था। स्थिति अत्यंत गंभीर थी।

परिजनों की सहमति से हुआ ऑपरेशन, आरोप गलत 

मरीज की नाजुक हालत के बारे में परिजनों को पूरी जानकारी दी गई। उनकी सहमति मिलने के बाद तुरंत ऑपरेशन किया गया, जिसमें मस्तिष्क में अत्यधिक सूजन पाई गई। इसके बाद मरीज को आईसीयू में रखकर बचाने का हर संभव प्रयास किया गया। अस्पताल के अनुसार, परिजनों ने ‘आयुष्मान कार्ड’ होने की जानकारी एक दिन बाद यानी 3 मार्च को दी थी। जानकारी मिलते ही इलाज को आयुष्मान योजना के तहत शामिल कर लिया गया। आपातकालीन जांच और शुरुआती प्रक्रियाओं के लिए केवल 15 हजार रुपये सुरक्षा निधि (Security Deposit) के रूप में जमा करवाए गए थे। लाखों रुपये वसूलने की बात पूरी तरह झूठी है।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच का आश्वासन

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डॉक्टरों की तरफ से कोई लापरवाही नहीं हुई। मरीज की मृत्यु के बाद कुछ लोगों के बहकावे में आकर अस्पताल के खिलाफ भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी फैलाई जा रही है। हंगामे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। प्रशासन ने परिजनों से पूरे मामले की लिखित शिकायत मांगी है। साथ ही यह आश्वासन दिया है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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