भराड़ीसैंण: “चार साल बाद हमारा क्या होगा?” … “आपको लोग ‘धाकड़ धामी’ क्यों कहते हैं?” … “सैनिक का बेटा होते हुए आप फौज में क्यों नहीं गए?”- ये कुछ सीधे सवाल थे जो मंगलवार को भराड़ीसैंण में अग्निवीर बनने की तैयारी कर रहे नौजवानों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूछे। CM धामी ने भी हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया और सबसे बड़ी चिंता, यानी भविष्य की नौकरी पर, एक बड़ा वादा किया।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अग्निवीरों का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार ने पुलिस और अन्य वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था कर दी है।” उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार भी कई क्षेत्रों में अग्निवीरों को मौके दे रही है।

‘धाकड़’ छवि और फौज का कनेक्शन
संवाद के दौरान जब रितेश पंवार नाम के कैडेट ने उनकी “धाकड़ धामी” वाली छवि का राज पूछा, तो मुख्यमंत्री मुस्कुराए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता से सौम्य होना चाहिए, लेकिन राज्य के हित में कई बार कड़े और साहसिक फैसले लेने पड़ते हैं।
उन्होंने गिनाया, “उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी और दंगा रोधी कानून भी लागू किए गए हैं। शायद इन्हीं फैसलों की वजह से जनता यह नाम देती है।”

एक और कैडेट शंकर सिंह राणा ने सैनिक पुत्र होने के नाते पूछा कि उनका मन सेना में जाने का क्यों नहीं हुआ। इस पर धामी ने कहा कि वह अपने पिता से मिले अनुशासन और समर्पण को ही अपनी राजनीति का आधार मानते हैं। उन्होंने कहा, “जिस तरह एक सैनिक देश की सेवा करता है, मैं उसी भावना से प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में जनता की सेवा कर रहा हूँ।”

परिवार के लिए वक्त कैसे निकालते हैं?
बातचीत में कुछ हल्के-फुल्के पल भी आए। जब हिमांशु रौतेला ने पूछा कि प्रदेश का मुखिया होने के नाते वे परिवार को कैसे समय देते हैं, तो CM ने कहा कि राजनीतिक जीवन में जिम्मेदारियां बड़ी होती हैं। उन्होंने कहा, “प्रदेश के सभी लोग मेरा परिवार हैं और सभी गांव मेरे अपने गांव हैं।”

इस संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देहरादून में बन रहे भव्य सैन्यधाम का भी जिक्र किया, जहां राज्य के वीर बलिदानियों की गाथाएं संजोई जाएंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर बनने की भी सराहना की। इस मौके पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.) और कई पूर्व सैनिक भी मौजूद थे।







