भराड़ीसैंण स्थित उत्तराखंड विधानसभा में बजट पेश होते ही राजनीतिक और नीतिगत दोनों संदेश साफ दिखे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट रखा, जिसे सरकार ने रोजगार, कनेक्टिविटी, सामाजिक सुरक्षा और तकनीकी उन्नयन के संतुलित पैकेज के रूप में पेश किया।
बजट भाषण के समानांतर सदन में टकराव भी दिखा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार जनता से जुड़े मुख्य सवालों पर चर्चा से बच रही है और विरोध दर्ज कराते हुए वॉकआउट किया। इससे बजट दिवस पर नीति और राजनीति, दोनों एक साथ केंद्र में रहे।
रोजगार, कृषि और MSME पर फोकस
युवा रोजगार और पलायन रोकने के लक्ष्य के साथ सरकार ने ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’ के लिए 60 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। इसी धुरी पर MSME क्षेत्र को सहारा देने के लिए 75 करोड़ रुपये रखे गए हैं, ताकि छोटे और मध्यम उद्यमों को पूंजी और विस्तार का आधार मिल सके।
कृषि क्षेत्र में आय बढ़ाने की नीति के तहत ‘मिशन एप्पल’ के लिए 42 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पशुपालन विभाग की लाभार्थी योजनाओं के लिए 42.02 करोड़ रुपये का प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे पहाड़ी और ग्रामीण परिवारों की सहायक आय को मजबूत करने की कोशिश दिखती है।
तकनीक, डेटा और शहरों के लिए अलग पैकेज
राज्य ने डिजिटल अवसंरचना पर भी स्पष्ट खर्च रेखा तय की है। AI मिशन के क्रियान्वयन के लिए 25 करोड़ रुपये, राज्य डेटा सेंटर को मजबूत करने के लिए 105 करोड़ रुपये और ITDA को अनुदान के रूप में 25 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार का संकेत है कि प्रशासनिक क्षमता और सेवा वितरण में तकनीक को केंद्रीय भूमिका दी जाएगी।
शहरी ढांचे के लिए शहरी निकायों को 1,814 करोड़ रुपये दिए गए हैं। पहाड़ी शहरों में सुविधाएं बढ़ाने के उद्देश्य से ‘स्मार्ट सिटी (पहाड़ी शहर)’ योजना के तहत 30 करोड़ रुपये और आवास विकास विभाग की अवस्थापना जरूरतों के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।
सामाजिक सुरक्षा, महिला-बाल पोषण और स्वास्थ्य
कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन मद में 1,327.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से लगभग 43.50 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
महिला और बाल कल्याण से जुड़ी मदों में सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के लिए 598.33 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री पोषण मिशन के लिए 149.45 करोड़ रुपये रखे गए हैं। ‘मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना’ को 30 करोड़, ‘आंचल अमृत योजना’ को 15 करोड़ और ‘वात्सल्य योजना’ को 15 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भी बजट का हिस्सा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट दस्तावेज के अनुसार दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और कैशलेस इलाज की व्यवस्था जारी रखने पर जोर रहेगा।
सड़क, गांव और सीमांत क्षेत्रों के लिए क्या रखा गया
कनेक्टिविटी सुधारने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) में 1,050 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सड़क मरम्मत और रखरखाव के हिस्से में ‘गड्ढा मुक्त सड़क अभियान’ के लिए अलग से 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत पूंजीगत मद में 1,642.20 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जबकि पंचायती राज संस्थाओं को 1,491 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सीमांत इलाकों के विकास के लिए ‘मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना’ के साथ ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ पर 40 करोड़ रुपये का प्रावधान भी रखा गया है।
सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मोर्चे पर नंदा देवी राजजात यात्रा के लिए 25 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। साथ ही हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा कॉरिडोर के शुरुआती काम के लिए 10-10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
कुल मिलाकर बजट का ढांचा एक साथ कई क्षेत्रों में संसाधन बांटता दिखता है-रोजगार से लेकर तकनीक तक और सामाजिक सुरक्षा से लेकर बुनियादी ढांचे तक। अब सदन के भीतर इस पर बहस और बाहर इसके क्रियान्वयन की गति, दोनों पर नजर रहेगी।
देवतुल्य जनता की आशाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति के उद्देश्य से आज गैरसैंण विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,11,703.21 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया। यह जन-जन का बजट है, जो प्रदेश के चहुंमुखी विकास को नई गति देते हुए आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त प्रदेश निर्माण के हमारे… pic.twitter.com/y7EqS63Fpb
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) March 9, 2026






