उत्तराखंड में चुनावी तैयारी अब औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में दिख रही है। शनिवार को हरिद्वार पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोडविन होटल में प्रदेश BJP की कोर कमेटी के साथ विस्तृत मंथन किया। इस बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी मौजूद रहे।
बैठक का सबसे प्रमुख बिंदु 2027 विधानसभा चुनाव रहा। पार्टी की ओर से जोर इस बात पर रहा कि संगठन और सरकार के बीच समन्वय जमीन पर और मजबूत हो, ताकि अगले चुनाव तक राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर तैयारी व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़े।
“सरकार और संगठन में तालमेल पर विशेष जोर देते हुए चुनावी तैयारियों को मजबूती से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।” — पार्टी सूत्र
जनसभा के बाद सीधे कोर कमेटी बैठक
हरिद्वार में कोर कमेटी की बैठक से पहले अमित शाह ने ‘जन-जन के द्वारा 4 साल बेमिसाल‘ कार्यक्रम के समापन के बाद एक जनसभा को संबोधित किया। इसी दौरान कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी हुआ। राजनीतिक रूप से यह क्रम महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि सार्वजनिक कार्यक्रम के तुरंत बाद संगठन की शीर्ष बैठक बुलाई गई।
बैठक में राज्य BJP के शीर्ष 24 नेता शामिल रहे। इसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, संगठन महामंत्री अजय कुमार, निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और डॉ. धनसिंह रावत शामिल रहे। प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत, कुंदन परिहार और तरुण बंसल भी बैठक में मौजूद रहे।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और तीरथ सिंह रावत ने भी भाग लिया। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, रेखा आर्य, गणेश जोशी और सौरभ बहुगुणा की मौजूदगी ने बैठक को संगठन और सरकार, दोनों धड़ों की संयुक्त रणनीतिक कवायद के रूप में स्थापित किया।
मिशन 2027: संगठनात्मक तैयारी और राजनीतिक लक्ष्य
बैठक का केंद्रीय एजेंडा साफ रहा—विधानसभा चुनाव 2027। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अमित शाह के मार्गदर्शन में यह समीक्षा की गई कि आने वाले महीनों में बूथ स्तर से लेकर नेतृत्व स्तर तक किस तरह की तैयारी की जरूरत होगी। राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य को लेकर चर्चा को दिशा दी गई।
इस मंथन में यह भी देखा गया कि सरकार के विकास कार्यों को संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए मतदाताओं तक कैसे पहुंचाया जाए। BJP के भीतर इसे केवल नियमित बैठक नहीं, बल्कि एक चुनाव-पूर्व संरचनात्मक अभ्यास के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें राजनीतिक संदेश, क्षेत्रीय प्राथमिकताएं और कार्यकर्ता-स्तर की सक्रियता तीनों को जोड़ने की कोशिश हुई।
हरिद्वार पर फोकस क्यों अहम माना जा रहा
बैठक का केंद्र हरिद्वार रखा जाना भी राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह आकलन रहा है कि 2022 चुनाव में हरिद्वार क्षेत्र में प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। ऐसे में आगामी रणनीति में इस क्षेत्र को अलग प्राथमिकता देने पर चर्चा होना स्वाभाविक माना गया।
यही वजह है कि हरिद्वार के दौरे में सार्वजनिक कार्यक्रम, विकास परियोजनाओं का संदेश और शीर्ष संगठनात्मक समीक्षा—तीनों को एक साथ रखा गया। इससे यह संकेत गया कि 2027 से पहले BJP राज्य में क्षेत्रवार रणनीति और नेतृत्व-स्तरीय समन्वय को समान महत्व देना चाहती है।
फिलहाल, हरिद्वार की यह बैठक उत्तराखंड BJP के लिए चुनावी रोडमैप की शुरुआती ठोस कड़ी मानी जा रही है। आने वाले चरण में संगठनात्मक फॉलो-अप, क्षेत्रीय समीक्षा और चुनावी तैयारी की रफ्तार पर नजर रहेगी।






