उत्तराखंड में आयोजित एक बहु-आयामी कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था, नागरिकता प्रक्रिया और साइबर अपराध नियंत्रण तीनों मोर्चों पर अहम घोषणाएं और औपचारिकताएं पूरी की गईं। गृहमंत्री ने मंच से नव नियुक्त आरक्षियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए, जबकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए 162 शरणार्थियों को भारत की नागरिकता के प्रमाणपत्र दिए गए। इसी अवसर पर राज्य में ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का शुभारंभ भी किया गया।
नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले आरक्षियों में अमन सिंह, आकाश, अभय चौहान, अर्जुन नाथ गोस्वामी और योगेश नाथ शामिल रहे। यह प्रक्रिया उत्तराखंड पुलिस में नई नियुक्तियों के औपचारिक शामिल होने का हिस्सा रही, जिसमें चयनित कर्मियों को मंच से दस्तावेज सौंपे गए।
162 शरणार्थियों को नागरिकता प्रमाणपत्र
आयोजन का दूसरा बड़ा हिस्सा नागरिकता प्रमाणपत्र वितरण रहा। पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आए कुल 162 शरणार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। मंच पर जिन लोगों को प्रतीकात्मक रूप से प्रमाणपत्र दिए गए, उनमें पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित सिद्धपीठ हिंगलाज माता मंदिर के पुजारी परिवार से जुड़े शैलेश, भट्टाग्राम (पाकिस्तान) से आए जसपाल कुमार, कराची में महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न से परेशान होकर भारत आईं दुर्गानाथ टी. राजपूत और अफगानिस्तान से आईं हंसेरी बाई शामिल रहीं।
यह वितरण प्रक्रिया उन मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण रही, जिनमें पड़ोसी देशों से आए परिवार लंबे समय से भारत में वैधानिक पहचान और अधिकारों की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करते रहे हैं। मंच से प्रमाणपत्र देने की यह कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर पूर्ण हुई प्रक्रिया का सार्वजनिक चरण रही।
ई-जीरो एफआईआर: साइबर धोखाधड़ी मामलों में शुरुआती कार्रवाई पर जोर
गृहमंत्री ने उत्तराखंड में ई-जीरो एफआईआर प्रणाली शुरू करने की घोषणा के साथ इसका औपचारिक शुभारंभ किया। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के तहत शुरू की जा रही है और इसे खास तौर पर एक लाख रुपये से अधिक की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए तैयार किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतें पहले देहरादून स्थित राज्य साइबर पुलिस स्टेशन में ई-जीरो एफआईआर के रूप में पंजीकृत होंगी। इसके बाद मामला सीसीटीएनएस के माध्यम से संबंधित थाने को तत्काल भेजा जाएगा।
इस प्रक्रिया का व्यावहारिक लक्ष्य शुरुआती समय में पुलिस प्रतिक्रिया तेज करना है। गोल्डन ऑवर में कार्रवाई शुरू होने से डिजिटल साक्ष्य जुटाने, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन को फ्रीज़ करने और ठगी गई राशि की रिकवरी की संभावना बढ़ाने में मदद मिलने की बात कही गई।
कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन और लघु फिल्म प्रदर्शन
इसी मंच पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भाषणों के संकलन पर आधारित गिरजा शंकर जोशी की पुस्तक ‘विकल्प रहित संकल्प’ का विमोचन भी किया गया। आयोजन के दौरान राज्य सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
कुल मिलाकर कार्यक्रम में पुलिस भर्ती से लेकर नागरिकता, और साइबर कानून प्रवर्तन से लेकर शासन संबंधी दस्तावेजी प्रस्तुति तक कई प्रशासनिक आयाम एक साथ सामने आए।






