राज्य के राजस्व ढांचे में खनन विभाग ने इस बार फिर बड़ा योगदान दर्ज किया है। उत्तराखंड खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तय 950 करोड़ रुपये के लक्ष्य को मार्च का इंतजार किए बिना ही पार करते हुए फरवरी 2026 तक 965 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल कर लिया। विभागीय स्तर पर इसे अब तक के प्रदर्शन की अहम उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लक्ष्य प्राप्ति आम तौर पर वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में तेज होती है, जबकि इस बार निर्धारित सीमा उससे पहले पार हो गई। राजस्व प्राप्ति के लिहाज से यह संकेत देता है कि संग्रह की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था दोनों अधिक प्रभावी हुई हैं।
लक्ष्य से आगे निकलने का अर्थ क्या है
वित्त विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए खनन विभाग को 950 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य सौंपा था। विभाग ने फरवरी तक ही 965 करोड़ रुपये अर्जित कर लिए, यानी तय सीमा से 15 करोड़ रुपये अधिक। वित्तीय वर्ष का एक महीना शेष रहते यह स्थिति राज्य के लिए अतिरिक्त राजस्व संभावनाओं का संकेत भी देती है।
खनन राजस्व सीधे तौर पर राज्य की वित्तीय क्षमता से जुड़ा माना जाता है, खासकर उन मदों में जहां योजनागत खर्च और बुनियादी ढांचे की जरूरतें एक साथ बढ़ती हैं। इसी वजह से विभाग का लक्ष्य से पहले आगे निकलना प्रशासनिक और वित्तीय दोनों दृष्टि से दर्ज किया जा रहा है।
यदि यही गति बनी रही तो वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक राजस्व करीब 1100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। — विभागीय अधिकारी
पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना
पिछले वर्ष यानी वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी विभाग ने लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया था। उस समय 875 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया था, जबकि वास्तविक राजस्व 1041 करोड़ रुपये रहा। उस अवधि में यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना गया था।
अब चालू वित्तीय वर्ष में फरवरी तक 965 करोड़ रुपये का संग्रह बताता है कि विभाग लगातार ऊंचे राजस्व स्तर बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है। एक अर्थ में यह भी स्पष्ट है कि पिछली उपलब्धि कोई एकबारगी उछाल नहीं थी, बल्कि प्रणालीगत बदलावों का असर जारी है।
तकनीकी परियोजनाओं की भूमिका
विभाग की ओर से इस प्रदर्शन के पीछे तकनीक-आधारित निगरानी तंत्र को प्रमुख वजह माना जा रहा है। MDTSS यानी माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम और ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर जैसे प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय स्तर पर स्कॉच अवार्ड 2025 के लिए चुना जाना भी इसी दिशा में एक संकेतक माना जा रहा है।
इन व्यवस्थाओं के जरिए अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर नियंत्रण मजबूत करने का दावा किया गया है। साथ ही गतिविधियों की ट्रैकिंग और सत्यापन प्रक्रिया अधिक डिजिटल और पारदर्शी हुई है, जिससे संग्रह प्रक्रिया में रिसाव कम करने में मदद मिली है।
अधिकारियों के अनुसार तकनीकी व्यवस्थाएं लागू होने के बाद राजस्व प्राप्ति में पिछले वर्षों की तुलना में लगभग चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा केवल संग्रह में बढ़ोतरी नहीं दिखाता, बल्कि निगरानी और अनुपालन के स्तर पर बदलाव की ओर भी इशारा करता है।
आगे की तस्वीर
फरवरी तक का संग्रह 965 करोड़ रुपये पहुंचने के बाद अब नजर मार्च के अंतिम आंकड़े पर है। यदि मौजूदा गति बनी रहती है और अनुमानित स्तर के करीब संग्रह होता है, तो वित्तीय वर्ष 2025-26 राज्य के खनन राजस्व के लिए नई सीमा तय कर सकता है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े यह बताते हैं कि विभाग ने निर्धारित लक्ष्य पार कर लिया है और पिछली उपलब्धि के बाद भी प्रदर्शन की रफ्तार बनी हुई है। राज्य की राजस्व संरचना में खनन से मिलने वाली हिस्सेदारी के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।






