कोलकाता के धर्मतला में चल रहे धरने के बीच सोमवार को राजनीतिक टकराव का नया आरोप सामने आया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और उसकी एजेंसियों से जुड़े लोग उनके धरनास्थल पर पर्चे बांट रहे थे। उन्होंने मंच से मौजूद समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि इस तरह की गतिविधि करने वालों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाए।
मुख्यमंत्री पिछले तीन दिनों से विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी SIR, के विरोध में शहर के बीचों-बीच धरना दे रही हैं। इसी दौरान उन्होंने कहा कि दूसरे राजनीतिक दल के कार्यक्रम में इस तरह प्रचार सामग्री बांटना स्वीकार्य नहीं है। बनर्जी ने यह भी कहा कि जिन लोगों पर पर्चे बांटने का आरोप है, वे विरोध का सामना होने के बाद वहां से भाग गए।
पर्चों में किस कार्यक्रम का जिक्र
मुख्यमंत्री के मुताबिक, जिन पर्चों का वितरण किया जा रहा था, उनमें 14 मार्च को कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित रैली का प्रचार था। यह आरोप उस समय लगाया गया, जब धर्मतला में उनका विरोध प्रदर्शन जारी था और मंच से लगातार SIR को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
ममता बनर्जी ने कहा कि किसी दूसरे दल की सभा, रैली या विरोध कार्यक्रम के बीच इस तरह पर्चे बांटना उचित नहीं है। उनके बयान में यह भी शामिल रहा कि उनके कार्यकर्ताओं को ऐसी स्थिति में सीधे पुलिस की मदद लेनी चाहिए।
किसी दूसरे राजनीतिक दल के कार्यक्रम में ऐसे पर्चे बांटने का उन्हें अधिकार नहीं है। उन्हें पकड़ो और पुलिस के हवाले कर दो। – ममता बनर्जी
पुलिस शिकायत का निर्देश और चुनाव प्रक्रिया पर आरोप
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार में मंत्री शशि पांजा को इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का निर्देश भी दिया। उनका आरोप था कि BJP चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल एजेंसियों के सहारे राजनीति कर रहे हैं।
धरना स्थल से दिए गए बयान में बनर्जी ने BJP पर जनता का समर्थन न होने का आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणी की। उनके शब्दों में, यह कोशिश राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए की जा रही है। हालांकि, सोमवार की इस पूरी घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर तत्काल कोई अलग आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया।
धर्मतला का यह धरना SIR के विरोध को केंद्र में रखकर जारी है और राज्य की राजनीति में यह मुद्दा लगातार प्रमुख बना हुआ है। तीसरे दिन सामने आया पर्चा विवाद अब इस विरोध की नई परत बन गया है, क्योंकि इसमें चुनावी प्रचार, धरना स्थल की मर्यादा और प्रशासनिक हस्तक्षेप-तीनों सवाल साथ दिखे।
फिलहाल, मुख्यमंत्री का रुख साफ है: धरनास्थल पर बाहरी राजनीतिक प्रचार की कोशिश का विरोध और मामले को पुलिस तक ले जाने की रणनीति। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठते हैं और इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है।





