यह पेंटिंग सिर्फ एक कलाकृति नहीं है, बल्कि इसमें स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी छिपा हुआ है। राहुल ने इस पूरी पेंटिंग को पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से बनाया है। इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक या कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
राहुल की इस अनोखी कला ने न सिर्फ उनके गांव बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। लोग इस पेंटिंग को देखकर उनकी कल्पनाशक्ति और मेहनत की सराहना कर रहे हैं।
जूट और गोबर से तैयार किया अनोखा कैनवास
राहुल देव लोहार की इस पेंटिंग की सबसे खास बात इसका बनाने का तरीका है। आमतौर पर कलाकार कैनवास और रंगों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन राहुल ने ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक संसाधनों को अपनी कला का हिस्सा बनाया।
उन्होंने जूट की बोरी यानी टाट के कपड़े को आधार बनाकर उस पर गाय के गोबर, मेथी के दाने और अन्य प्राकृतिक सामग्री का लेप लगाया। इस प्रक्रिया के बाद उन्होंने उसी पर अपनी पेंटिंग तैयार की।
इस पूरी पेंटिंग में इस्तेमाल किए गए रंग भी प्राकृतिक हैं। राहुल ने खुद ही प्राकृतिक तत्वों से रंग तैयार किए और उन्हीं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां की तस्वीर उकेरी। यह तरीका न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि भारतीय ग्रामीण संस्कृति को भी दर्शाता है।
स्वदेशी और विश्वकर्मा योजना से मिली प्रेरणा
राहुल देव लोहार बताते हैं कि उन्हें इस पेंटिंग को बनाने की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी और विश्वकर्मा योजना के संदेश से मिली। प्रधानमंत्री ने देश के कारीगरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को अपनाने और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने की बात कही है।
राहुल कहते हैं कि जब उन्होंने यह संदेश सुना तो उनके मन में विचार आया कि क्यों न अपनी कला के माध्यम से भी स्वदेशी का संदेश दिया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने आधुनिक और कृत्रिम सामग्रियों को छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से पेंटिंग बनाने का फैसला किया।
पीएम मोदी और मां की ममतामयी छवि को किया चित्रित
राहुल ने अपनी पेंटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माताजी की एक बेहद भावुक तस्वीर को उकेरा है। इस पेंटिंग में मां और बेटे के बीच के स्नेह और ममता को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है।
राहुल का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा अपनी मां के प्रति सम्मान और प्रेम दिखाया है। इसलिए उन्होंने उसी भाव को अपनी कला में उतारने की कोशिश की। इस पेंटिंग के माध्यम से राहुल ने यह दिखाया है कि मां और बेटे का रिश्ता कितना खास होता है। यही वजह है कि इस तस्वीर को देखने वाले लोग भावुक हो जाते हैं।
पहले भी बना चुके हैं वर्ल्ड रिकॉर्ड
यह पहली बार नहीं है जब राहुल देव लोहार अपनी कला के कारण चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी उन्होंने कोरोना काल के दौरान अपनी अनोखी पेंटिंग्स के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। उस समय उनकी कलाकृतियों को काफी सराहना मिली थी और उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ था।
राहुल लगातार नई और अलग तरह की कला बनाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि उनकी कला समाज को कोई सकारात्मक संदेश दे।
ग्रामीण संस्कृति को कला में उतारने की कोशिश
राहुल का मानना है कि कलाकार का संबंध हमेशा प्रकृति और समाज से जुड़ा होना चाहिए। वे कहते हैं कि ग्रामीण जीवन में हमें कई ऐसी चीजें देखने को मिलती हैं जो प्रकृति के बेहद करीब होती हैं। जूट की बोरी, गोबर और प्राकृतिक रंग जैसी चीजें गांवों में आम हैं, लेकिन लोग अक्सर इनका महत्व नहीं समझते। राहुल ने इन्हीं साधारण चीजों को अपनी कला का हिस्सा बनाकर यह दिखाया है कि प्रकृति के साथ जुड़कर भी अद्भुत कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं।
पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
आज के समय में जब प्रदूषण और पर्यावरण की समस्या बढ़ती जा रही है, तब राहुल की यह पेंटिंग एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। रासायनिक रंगों और कृत्रिम सामग्री के बजाय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता। राहुल का कहना है कि अगर कलाकार प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल करें तो इससे पर्यावरण की रक्षा भी होगी और कला का एक नया स्वरूप भी सामने आएगा।
स्थानीय कला को मिला नया मंच
राहुल की इस अनोखी पेंटिंग ने यह भी साबित कर दिया है कि छोटे गांवों में भी बड़ी प्रतिभाएं मौजूद हैं। अगर उन्हें सही मंच और प्रोत्साहन मिले तो वे अपनी कला के जरिए देश और दुनिया में पहचान बना सकते हैं। राहुल की यह कलाकृति ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों का भी प्रतीक बन गई है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
राहुल देव लोहार की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने यह दिखाया है कि अगर किसी व्यक्ति के अंदर जुनून और मेहनत करने का जज्बा हो तो वह सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। उनकी कला न केवल एक चित्र है बल्कि यह एक विचार और संदेश भी है।






