Rajasthan Politics: राजस्थान में बजरी माफियाओं की दबंगई और बढ़ते प्रभाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राज्य में न तो सुशासन बचा है और न ही जनप्रतिनिधियों का सम्मान। उन्होंने लिखा कि “बेखौफ माफियाओं के आगे कानून का नामो-निशान मिट गया है और सत्ता पक्ष के विधायकों की ऐसी लाचारी पहले कभी नहीं देखी गई।”
सत्ताधारी विधायक की लाचारी का उदाहरण
डोटासरा ने अपने पोस्ट में भाजपा के गढ़ी से विधायक का उदाहरण देते हुए कहा कि वो थाने में बैठकर गिड़गिड़ा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब विधायक की नहीं सुनी जा रही, तो आम आदमी को कौन सुनेगा?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजरी और भू-माफियाओं को सरकार और पुलिस प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है, जिससे पूरे प्रदेश में माफिया राज जैसा माहौल बन गया है।
स्कूलों में पौधारोपण बना नया ‘सिलेबस’
वहीं दूसरी ओर, राजस्थान सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए शुरू किए गए हरियालो राजस्थान अभियान को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इस अभियान के तहत छात्रों और शिक्षकों को रोजाना पौधे लगाने और उसकी सेल्फी पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। आदेश के मुताबिक, कक्षा 1 से 9 तक के छात्रों को प्रतिदिन 10 पौधे और कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को 15 पौधे लगाने का टारगेट मिला है। शिक्षकों के लिए भी प्रतिदिन 15 पौधे लगाने का निर्देश जारी किया गया है।
शिक्षा या सिर्फ पौधे?
इस आदेश को लेकर शिक्षा विभाग और स्कूलों में असमंजस की स्थिति है। स्कूलों में हिंदी, गणित और विज्ञान जैसी पढ़ाई की जगह अब फोकस पौधे लगाने और फोटो अपलोड करने पर हो गया है। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, 15 दिनों तक पौधारोपण करने वाले छात्रों को परीक्षा में बोनस अंक भी दिए जाएंगे। अधिकारी भी इस आदेश पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं, क्योंकि इसे लागू करना व्यवहारिक रूप से मुश्किल नजर आ रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या पौधे लगाना बच्चों की शिक्षा से भी ऊपर हो गया है?





