राजस्थान की राजधानी जयपुर को अक्सर पिंक सिटी और स्मार्ट सिटी के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन शहर के सबसे पॉश इलाके सिविल लाइंस में सामने आई यह घटना अलग ही तस्वीर दिखा रही है। दरअसल यहां दूषित पानी पीने के बाद 500 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं। बता दें कि सिविल लाइंस वही इलाका है जहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल, कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहते हैं। ऐसे वीआईपी इलाके में यह स्थिति सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है।
दरअसल सिविल लाइंस की सुशीलपुरा बस्ती में करीब 700 से 800 मकान हैं। इन घरों में रहने वाले 500 से अधिक लोग पिछले कुछ दिनों में दूषित पानी पीने से बीमार हो गए। लोगों को उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं हो रही हैं। कई लोग चार दिनों से बिस्तर पर हैं और कुछ मरीजों को अस्पताल जाकर ग्लूकोज चढ़वाना पड़ा। इसके बाद वे घर पर आराम कर रहे हैं। बस्ती में लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है, जिससे लोगों में डर का माहौल है।
पानी को पीने के बाद लोग बीमार होने लगे
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले तीन दिनों तक नलों से बेहद गंदा और बदबूदार पानी आया। इसी पानी को पीने के बाद लोग बीमार होने लगे। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य मौसमी बीमारी समझा, लेकिन जब बड़ी संख्या में लोग एक साथ बीमार होने लगे तो मामला गंभीर हो गया। प्रशासन ने अब पानी की सप्लाई ठीक होने का दावा किया है, लेकिन कई लोगों का कहना है कि अभी भी पानी में पीलापन नजर आ रहा है। सुशीलपुरा बस्ती के लोग अब सप्लाई का पानी पीने से डर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि फिर से गंदा पानी आ सकता है। इसी वजह से लोग दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। प्रशासन ने इलाके में साफ पानी के टैंकर भेजने शुरू किए हैं और लोग टैंकर के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि हर घर में टैंकर का पानी पर्याप्त नहीं है, इसलिए कई लोग बाजार से आरओ का पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
वीआईपी इलाके में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। यह मामला सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही का भी है। कुछ दिन पहले नाराज लोगों ने अपनी नाराजगी जताते हुए बीजेपी के स्थानीय विधायक गोपाल शर्मा को भी नल से आया गंदा पानी पीने के लिए दिया था। इस घटना के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
विपक्ष का सरकार पर हमला
वहीं राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर राज्य के सबसे वीआईपी इलाके में यह हाल है, जहां मुख्यमंत्री और राज्यपाल रहते हैं, तो दूर-दराज के गांवों और गरीब बस्तियों में पानी की स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है।
हालांकि मामला बढ़ने के बाद प्रशासन ने जांच और सुधार की बात कही है। हालांकि अभी भी कई सवाल बाकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं, तब भी इलाके में कोई मेडिकल कैंप क्यों नहीं लगाया गया। लोगों को अपने खर्च पर इलाज करवाना पड़ रहा है। इस घटना ने सरकारी व्यवस्था और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






