राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर गहमागहमी तेज हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चार साल पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है। यह मुद्दा मल्लिकार्जुन खरगे के कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही खत्म हो गया था। अशोक गहलोत ने साफ किया है कि अगर सोनिया गांधी और कांग्रेस उन्हें अध्यक्ष बनाना चाहतीं तो वह जरूर बनते। अशोक गहलोत ने कहा, वह इसके लिए कभी मना नहीं करते। लेकिन इसके साथ ही अशोक गहलोत ने एक बड़ी साजिश की बात का भी जिक्र किया है।
अशोक गहलोत ने कहा, ‘अगर कांग्रेस और सोनिया गांधी मुझे कांग्रेस अध्यक्ष बनातीं, तो क्या मैं मना करूंगा?’ उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे ख्याल से वो एक बड़ी साजिश थी। वहां अचानक पर्यवेक्षक आ गए थे। फिर अचानक ये तमाशा हो गया और बदनाम मैं हो गया। अब लोगों को लगता है कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बने रहना था इसलिए रीवोल्ट करा दिया।’
अशोक गहलोत बयान पर मंत्री जोगाराम पटेल की प्रतिक्रिया
अशोक गहलोत के इस बयान पर राजस्थान सरकार के मंत्री जोगाराम पटेल ने प्रतिक्रिया दी है। जोगाराम पटेल ने कहा, जब-जब सचिन पायलट का नाम किसी प्रतिष्ठित पद के लिए आगे किया जाता है या उसकी संभावना बनती है, अशोक गहलोत होटल में बंद होने वाली कहानी फिर दोहरा देते हैं। जोगाराम पटेल ने आगे कहा, अशोक गहलोत प्रत्यक्ष तौर पर सचिन पायलट पर आरोप लगाते हैं। वह कहते हैं कि सचिन पायलट ने BJP के साथ मिलकर पार्टी तोड़ने की कोशिश की थी। जोगाराम पटेल ने सवाल उठाया, अगर उनकी सरकार में ऐसी कोई घटना हुई थी तो उन्होंने आज तक केस क्यों नहीं दर्ज कराया?
जोगाराम पटेल ने दावा किया, अशोक गहलोत खुद अपनी पार्टी में दरकिनार हो चुके हैं। इसलिए वह बिना किसी आधार पर ऐसे स्टेटमेंट देने के आदि हो चुके हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह घटनाक्रम साल 2022 के सियासी संकट से जुड़ा है। उस समय अशोक गहलोत को कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाने की बात चली थी। इसके बाद राजस्थान कांग्रेस में सियासी संकट और विद्रोह खड़ा हो गया था। कांग्रेस आलाकमान अशोक गहलोत को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़वाना चाहता था। लेकिन इसके लिए अशोक गहलोत को अपना मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ता। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा था कि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद से हटते ही यह जिम्मेदारी सचिन पायलट को सौंपी जाएगी। लेकिन अशोक गहलोत खुद सीएम की कुर्सी छोड़ने के लिए राजी नहीं थे। वह सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने के भी पक्ष में नहीं थे।
सितंबर, 2022 में कांग्रेस नेतृत्व ने जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई थी। इसका मकसद नए सीएम के नाम का निर्णय करना था। लेकिन गहलोत के समर्थक विधायकों ने इस मीटिंग का बहिष्कार कर दिया था। कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक बैठक का इंतजार ही करते रह गए। गहलोत के समर्थक विधायक वहां नहीं पहुंचे थे। इसके बाद, गहलोत गुट के लगभग 90 से ज्यादा विधायक शांति धारीवाल के घर पर जमा हुए थे। वहां से ये सभी तत्कालीन स्पीकर सीपी जोशी के आवास पर गए। उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया था। विधायकों ने मांग की थी कि राजस्थान का नया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पसंद का ही हो।
इस खुले विद्रोह से कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व बहुत नाराज हो गया था। हालांकि, इसके बाद अशोक गहलोत ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की। उन्होंने घटना पर खेद जताया था। अशोक गहलोत ने इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी भी ली थी। उसके बाद, अशोक गहलोत खुद कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से बाहर हो गए थे। इसी के बाद मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था।
#WATCH जयपुर: कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, “…अगर सोनिया गांधी और कांग्रेस मुझे कांग्रेस अध्यक्ष बनातीं, तो क्या मैं मना करूंगा? मेरे ख्याल से वो एक बड़ी साज़िश थी। अचानक पर्यवेक्षक आ गए। अचानक ये तमाशा हो गया और बदनाम मैं हो गया…लोगों को लगता है कि अशोक गहलोत को… pic.twitter.com/TGAkRmwkIE
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 7, 2026





