राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक बयान ने नया सियासी घमासान खड़ा कर दिया है। दरअसल गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं को सलाह दी थी कि वे अपने बेटों को सियासत और सत्ता के कामकाज से दूर रखें। वहीं इस नसीहत पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने तीखा पलटवार किया है। दरअसल राठौड़ ने गहलोत पर ‘पुत्र मोह’ का आरोप लगाते हुए पिछली कांग्रेस सरकार के कई फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
दरअसल राजेंद्र राठौड़ ने अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए एक मशहूर शेर पढ़ा, “सारी उम्र गुजार दी इश्क-ए-बुतों में मोमिन, अब आखिरी उम्र में क्या खाक मुसलमान होंगे।” वहीं इस शायराना अंदाज से राठौड़ ने गहलोत की नसीहत पर करारा तंज कसा है। दरअसल राठौड़ का इशारा साफ था कि जो व्यक्ति खुद जिंदगी भर ‘पुत्र मोह’ में रहा हो, वह दूसरों को ऐसी सलाह कैसे दे सकता है।
मंत्री पुत्रों को सरकार के कामकाज से अलग रहना चाहिए: राजेंद्र राठौड़
दरअसल राठौड़ ने गहलोत की नसीहत को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह बात बिल्कुल सही है कि मंत्री पुत्रों को सरकार के कामकाज से अलग रहना चाहिए। यह एक आदर्श स्थिति है। लेकिन उन्होंने अशोक गहलोत को उनका अपना इतिहास याद दिलाया। राठौड़ ने कहा कि गहलोत साहब ने कांग्रेस के कई कर्मठ और पुराने नेताओं के हक मारकर अपने बेटे को चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। यह सिर्फ एक चुनावी फैसला नहीं था, बल्कि पार्टी के अंदरूनी लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा था।
अपने ही बेटे को RCA के चुनाव में अध्यक्ष बनवाया : राजेंद्र राठौड़
वहीं बात यहीं नहीं रुकी। दअरसल राजेंद्र राठौड़ ने यह भी कहा कि गहलोत ने अपने ही बेटे को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव में अध्यक्ष बनवाया था। वहीं यह भी ‘पुत्र मोह’ का एक स्पष्ट उदाहरण है जहां खेल संगठन के मुखिया पद पर अपने बेटे की ताजपोशी के लिए राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल किया गया। राठौड़ ने इस बात पर जोर दिया कि एक तरफ तो गहलोत साहब दूसरों को बेटों को राजनीति से दूर रखने की सलाह देते हैं, और दूसरी तरफ उन्होंने खुद अपने बेटे को राजनीतिक और खेल के महत्वपूर्ण पदों पर स्थापित किया।
दरअसल पिछली कांग्रेस सरकार के कामकाज को घेरते हुए राठौड़ ने कई बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान डिग्रियों और नौकरियों की खुलेआम लूट हुई। बेरोजगार नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। परीक्षाओं में अनियमितताएं और भर्ती घोटालों ने युवाओं का भरोसा तोड़ा। इसके ठीक उलट, राठौड़ ने दावा किया कि वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार ने सत्ता में आने के बाद से अब तक 92 हजार नौजवानों को सरकारी नौकरी दी है। यह आंकड़ा पिछली सरकार के कार्यकाल में नौकरियों की स्थिति से बिल्कुल अलग है।






