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उदयपुर की यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर ने की औरंगजेब की तारीफ तो मचा बवाल, गुस्साए छात्रों ने तोड़े शीशे

Written by:Deepak Kumar
Published:
उदयपुर की यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर ने की औरंगजेब की तारीफ तो मचा बवाल, गुस्साए छात्रों ने तोड़े शीशे

राजस्थान के उदयपुर में मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रोफेसर सुनीता मिश्रा के बयान ने हलचल मचा दी। उन्होंने हाल ही में एक कार्यक्रम में मुगल शासक औरंगजेब को ‘कुशल प्रशासक’ बताया था। इसके बाद एबीवीपी के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि यह बयान मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा का अपमान है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासनिक भवन के शीशे तोड़ दिए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख पुलिस को बुलाना पड़ा। यह मुद्दा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

पुतला फूंककर विरोध, बर्खास्त की मांग

विरोध कर रहे छात्रों ने वाइस चांसलर सुनीता मिश्रा का पुतला जलाया और नारेबाजी की। छात्र संगठन ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्रों ने कुलपति को बर्खास्त करने की मांग की। पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, लेकिन छात्र अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटे। मौके पर पुलिस उपाधीक्षक छगन पुरोहित सहित कई अधिकारी पहुंचे। उन्होंने हालात को काबू में करने की कोशिश की। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन मेवाड़ की परंपरा का अपमान नहीं कर सकता।

कार्यक्रम में दिया गया विवादित बयान

प्रोफेसर सुनीता मिश्रा ने पिछले हफ्ते विश्वविद्यालय में आयोजित ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली: विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप’ संगोष्ठी में औरंगजेब की प्रशासनिक क्षमताओं का उल्लेख करते हुए उसे कुशल शासक बताया था। छात्रों ने इसे गलत माना और कहा कि यह मेवाड़ की शौर्य परंपरा के खिलाफ है। वहीं बीजेपी ने भी इस बयान की कड़ी निंदा की। शहर जिला महामंत्री डॉ. पंकज गोराणा ने कहा कि महाराणा प्रताप की भूमि पर ऐसा बयान स्वीकार्य नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामला अब राजनीति का रूप ले चुका है।

वाइस चांसलर का स्पष्टीकरण

बवाल बढ़ने के बाद प्रोफेसर सुनीता मिश्रा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका बयान संदर्भ से अलग करके पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद औरंगजेब का महिमामंडन करना नहीं था। उनका उद्देश्य केवल प्रशासनिक कौशल का उल्लेख करना था। लेकिन इसे गलत तरीके से समझा गया। बावजूद इसके, छात्रों का विरोध जारी है। प्रशासन अब स्थिति शांत कराने में जुटा है। यह मामला राजस्थान की राजनीति में सुर्खियों में है और आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।