रतलाम जिले के जावरा क्षेत्र के बिनोली गांव में मावे की बर्फी खाने के बाद एक परिवार के तीन लोगों की तबीयत बिगड़ गई। वहीं तीन साल के आर्यन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया जबकि उसकी मां अस्पताल में भर्ती है और पिता जितेंद्र गोस्वामी की हालत में सुधार है। बच्चे की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण मिठाई की दुकान पर पहुंचे। यहां हंगामा हुआ और भीड़ ने दुकान के काउंटर के कांच तोड़ दिए। खाद्य विभाग ने दुकान से मिठाई के सैंपल लिए हैं वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जितेंद्र गोस्वामी के मुताबिक उन्होंने गुरुवार दोपहर जावरा में कमानी गेट के पास स्थित देवश्री मिठाई की दुकान से मावे की बर्फी खरीदी थी। उसी रात जितेंद्र, उनकी पत्नी और तीन साल के बेटे आर्यन ने बर्फी खाई। परिवार का आरोप है कि मिठाई खाने के बाद तीनों को उल्टियां होने लगीं और उनकी तबीयत बिगड़ गई।

शनिवार दोपहर आर्यन की मौत हो गई

दरअसल परिजन पहले तीनों को पास के गांव में एक डॉक्टर के पास लेकर गए। इसके बाद शुक्रवार सुबह वे इलाज के लिए जावरा पहुंचे। यहां दो निजी अस्पतालों में इलाज कराने की कोशिश की गई। हालत को देखते हुए परिवार शनिवार सुबह मंदसौर के एक निजी अस्पताल पहुंचा जहां मां और बेटे को भर्ती कराया गया। वहीं इलाज के दौरान शनिवार दोपहर आर्यन की मौत हो गई। पिता जितेंद्र की तबीयत में सुधार बताया गया है जबकि बच्चे की मां अस्पताल में भर्ती है। परिवार के लिए यह घटना बड़ा सदमा बन गई। हालांकि बर्फी खाने और बच्चे की मौत के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

1500 रुपये देकर भगाने का आरोप

वहीं आर्यन की मौत के बाद उसके परिजन और गांव के लोग देवश्री मिठाई की दुकान पर पहुंचे। वहां लोगों ने हंगामा किया और दुकान के काउंटर के कांच तोड़ दिए। भीड़ में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि जहरीली मिठाई बेचने के कारण उन्होंने अपना बच्चा खो दिया। फिलहाल मिठाई में किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई है। मृत बच्चे के चाचा कालू गिरी गोस्वामी ने दुकानदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दुकानदार शुक्रवार को मिठाई वापस ले गया और उसे कचरे में फेंक दिया। चाचा के मुताबिक दुकानदार ने इलाज के लिए 1500 रुपये दिए और उन्हें वहां से भगा दिया। ये आरोप परिजनों की ओर से लगाए गए हैं।

दरअसल घटना की जानकारी मिलने के बाद गांव के सरपंच ने खाद्य विभाग और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद खाद्य विभाग की टीम दुकान पर पहुंची और जांच के लिए मिठाई के सैंपल लिए। सैंपल की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मिठाई की गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी थी या नहीं।