रतलाम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी आशिक हुसैन से 55 लाख रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दरअसल आरोपियों में दो हैदराबाद और एक कर्नाटक के धारवाड़ से पकड़ा गया है। ठगों ने कारोबारी को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संपर्क और टेरर फंडिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाया था। पुलिस ने ठगी की रकम में से 20 लाख रुपए पहले ही होल्ड करवा दिए थे।
दरअसल रतलाम के माणकचौक थाना क्षेत्र में रहने वाले ऑटो पार्ट्स कारोबारी आशिक हुसैन को ठगों ने सितंबर में तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर घर में कैद रखा। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कारोबारी पर गंभीर आरोप लगाए और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। इस दौरान उनसे अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के जरिए करीब 55 लाख रुपए जमा करवा लिए गए। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस और साइबर सेल ने बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की। इसी जांच के आधार पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय
बता दें कि कारोबारी का कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय है और वह पिछले छह महीने से रतलाम में रह रहे थे। पुलिस के मुताबिक ठगों ने उन्हें बताया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े लोगों से संपर्क और आतंकवादी फंडिंग के लिए किया गया है। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से कॉल कर उन्हें जांच के नाम पर डराया गया। अब पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई और इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं।
रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई
वहीं पुलिस की जांच में सामने आया कि कारोबारी से ठगी गई रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई थी। इनमें से एक एक्सिस बैंक खाते में 35 लाख रुपए जमा होने की जानकारी मिली। बैंक से पता चला कि यह खाता SRI VENKATESHWARA PRI LIMITED नाम की कंपनी से जुड़ा था। खाते और कंपनी से संबंधित जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम हैदराबाद पहुंची और कोडारी वेंकटेश को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने हैदराबाद से आरोपी को गिरफ्तार किया
इसके बाद बैंक ट्रांजेक्शन की आगे जांच की गई। पुलिस टीम ने कर्नाटक के धारवाड़ से अशोक अन्यया को गिरफ्तार किया। जांच में एक अन्य खाते में 5 लाख 84 रुपए ट्रांसफर होने की जानकारी भी सामने आई। इस खाते से जुड़े मीर यूसुफ को भी पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को अब कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है ताकि ठगी की रकम के लेन-देन और दूसरे लोगों की भूमिका के बारे में पूछताछ की जा सके।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कोडारी वेंकटेश पिता राजन्ना कोडारी, तेलंगाना, अशोक अन्यया, निवासी मराठा कॉलोनी, धारवाड़, कर्नाटक; और मीर यूसुफ पिता मीर आजम, निवासी चारमीनार, मदीना नगर, हैदराबाद के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि बैंक खातों की जांच से ठगी के नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों का पता चला है। अब यह जांच की जा रही है कि इन खातों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और रकम आगे किन लोगों तक पहुंचाई गई। रतलाम के एसपी अमित कुमार के मुताबिक, मामले में हैदराबाद से दो और धारवाड़ से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ और बैंक खातों की जांच के जरिए अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल इस ठगी की शुरुआत 15 सितंबर 2026 को हुई थी। एक अज्ञात व्यक्ति ने कारोबारी को कॉल कर खुद को मुंबई के कोलाबा इलाके का पुलिस अधिकारी बताया। उसने कारोबारी के मोबाइल नंबर, व्यवसाय और भारत में रहने से जुड़ी जानकारी पूछी। इसके बाद एक दूसरे मोबाइल नंबर का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उसका इस्तेमाल पाकिस्तान की ISI से जुड़े एजेंट से बातचीत के लिए किया गया है। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी और वरिष्ठ निरीक्षक बताते हुए कहा कि कारोबारी के खिलाफ FIR दर्ज है। आरोपियों ने उनसे आधार कार्ड और पैन कार्ड से जुड़ी जानकारी भी ली। फिर उन्हें बताया गया कि जरूरी NOC नहीं होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
ऐसे जाल में फंसाया
16 सितंबर को ठगों ने कॉल को कथित तौर पर ATS विभाग में ट्रांसफर करने का नाटक किया। इसके बाद वॉट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने लोगों से बात कराई गई। आरोपियों ने हथियारों से जुड़ी तस्वीरें भेजकर उनमें दिख रहे लोगों की पहचान करने को कहा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड पर तैयार कथित दस्तावेज भेजकर कारोबारी को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उनके खिलाफ मामला दर्ज है। कानूनी कार्रवाई से बचाने और बैंक खातों के सत्यापन का बहाना बनाकर आरोपियों ने कारोबारी से 55 लाख रुपए अलग-अलग खातों में RTGS के जरिए जमा करवा लिए। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।






