आज नवरात्रि का दूसरा दिन है जिसे माता ब्रह्मचारिणी से जोड़कर देखा जाता है। इन नौ दिनों में माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी को पूजा जाता है जो तपस्या, ज्ञान और संयम की प्रतीक है। इनकी पूजा करने वाले जातक के जीवन में धैर्य और ज्ञान आता है।
अगर आप यह चाहते हैं कि आपका जीवन में आत्मविश्वास ज्ञान और मानसिक शक्ति बनी रहे तो आपको माता की पूजन जरूर करनी चाहिए। चलिए पूजा की विधि, माता के प्रिय भोग और उनके स्वरूप के बारे में जान लेते हैं।
कैसा है मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
माता ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की बात करें तो उन्हें विद्या और ज्ञान की देवी कहा गया है। वह सफेद रंग के वस्त्र धारण किए हुए हैं। उनके एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में अष्टदल की माला रहती है। देखने में उनका रूप बहुत ही सुंदर और सरल नजर आता है। ऐसा कहते हैं की माता अपने भक्तों से बहुत जल्दी प्रसन्न होती हैं और उन पर हमेशा अपनी कृपा बनाकर रखती हैं। माता की पूजन से सारे मनोकामनाएं पूरी की जा सकती है।
कैसे करें पूजा
- नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठ स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। ये वस्त्र अगर पीले रंग के होंगे तो और भी अच्छा रहेगा क्योंकि माता को यह प्रिय है।
- अब आपको अपने पूरे घर को गंगाजल से शुद्ध करना होगा।
- अब माता को पंचामृत स्नान करवाएं इसके लिए दूध, दही, घी, चीनी और शहद का उपयोग किया जा सकता है।
- अब रोली कुमकुम से माता को तिलक करें और दीपक प्रज्ज्वलित करें।
- अगर आप हवन करना चाहते हैं तो आहुति के लिए या तो हवन सामग्री या फिर लौंग बताशे अग्नि में अर्पित कर सकते हैं।
- आखिर में माता की आरती करें और उन्हें पान का पत्ता और सुपारी अर्पित करें।
लगाएं इन चीजों का भोग
माता ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें मिश्री का भोग लगाना शुभ माना गया है। ऐसा करने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। माता को पीला रंग पसंद है इसलिए आप उन्हें पीले रंग के फल अर्पित कर सकते हैं। इससे जीवन में सकारात्मकता आती है और स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






