हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन व्रत और स्नान दान का विशेष महत्व है। वैसे तो हर पूर्णिमा तिथि पर यह सब किया जाता है लेकिन चैत्र का महीना होने की वजह से ये ओर भी खास हो जाती है।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह तिथि बहुत शुभ मानी गई है। इस दिन व्रत करने वाले साधक रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करते हैं। चलिए आपको शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय बता देते हैं।
चैत्र पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को सुबह 7:06 पर शुरू हो रही है और इसका समापन 2 अप्रैल को सुबह 7:41 पर होगा। चंद्रोदय के समय की बात करें तो शाम 6:11 पर चंद्रोदय हो जाएगा।
वहीं उदया तिथि के अनुसार चैत्र पूर्णिमा गुरुवार 2 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना और अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों को दान देने का विशेष महत्व है। इस दिन चंद्रोदय शाम 7:07 बजे पर होगा। ब्रह्म मुहूर्त का समय प्रातः 4:38 से 5:24 तक का है।
क्या है महत्व
भविष्य पुराण के मुताबिक चैत्र पूर्णिमा का व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख और सौभाग्य लेकर आता है। इससे पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। चैत्र पूर्णिमा हिंदू वर्ष की प्रथम पूर्णिमा है, जिसकी वजह से इसका महत्व ज्यादा है। इस तिथि पर हनुमान जयंती का पर्व भी मनाया जाता है।
जरूर करें ये उपाय
- पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना गया है। अगर संभव नहीं है तो आप अपने नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
- पूर्णिमा के मौके पर भगवान सत्यनारायण की पूजा जरूर करें और व्रत का पालन करें।
- इस दिन हनुमान जयंती होती है ऐसे में बजरंगबली को चोला चढ़ा कर हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।
- पूर्णिमा की शाम तुलसी के पास घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए।
- रात के समय चंद्रदेव को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य देना शुभ माना गया है।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






