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बरसाना में 8 मार्च को मनाई जाएगी लट्ठमार होली, उत्सव में विदेश से शामिल होने आते हैं भक्त, जाने कैसे हुई परंपरा की शुरूआत

Written by:Sanjucta Pandit
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यदि बात करें लट्ठमार होली की, तो इसकी शुरुआत कैसे हुई। इस परंपरा को कब से निभाई जाती है। इसके बारे में आज हम आपको बताएंगे। पढ़ें विस्तार से पूरी खबर...
बरसाना में 8 मार्च को मनाई जाएगी लट्ठमार होली, उत्सव में विदेश से शामिल होने आते हैं भक्त, जाने कैसे हुई परंपरा की शुरूआत

Lathmar Holi 2025 : भारत में होली का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसके लिए लोग सालभर इंतजार करते हैं। हर राज्य में इसे अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। कहीं लट्ठमार होली खेली जाती है, तो कहीं फूलों और अबीरो की होली खेली जाती है। कहीं मसान की होली फेमस है, तो कहीं पर रंग पंचमी के रूप में होली का त्यौहार मनाया जाता है। तो वहीं बरसाना में लट्ठमार होली मनाई जाती है। देश में तो यह बड़े उत्साह के साथ मनाया ही जाता है। बहुत सारे स्थान ऐसे भी है, जहां विदेश से भी लोग लट्ठमार होली खेलने पहुंचते हैं। मथुरा की होली देश भर में सबसे अधिक प्रसिद्ध है। इस दौरान लोगों में अलग ही तरह का रौनक देखने को मिलता है।

ब्रज में होली की शुरुआत की बात करें, तो यह वसंत पंचमी के दिन से ही हो जाती है, जो कि 40 दिनों तक चलता है। होली उत्सव के दौरान लोग अपने पुराने सारे गिले शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग और अबीर लगाते हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में होली की अलग धूम देखने को मिलती है।

8 मार्च को मनाई जाएगी लट्ठमार होली

इससे पहले हम आपको यह बता दें कि पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने की नवमी तिथि की शुरुआत 7 मार्च को सुबह 9:18 से होगी, जिसका समापन 8 मार्च को सुबह 8:16 पर होगा। ऐसे में 8 मार्च को लट्ठमार होली मनाई जाएगी।

पौराणिक कथा

बता दें कि यह परंपरा राधा-कृष्ण की प्रेम कथा से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण नंद के गांव में रहते थे और राधा बरसाना में रहती थी। ऐसे में एक बार कृष्ण जी राधा से मिलने बरसाना पहुंचे, जहां वह राधा और उनकी सखियों को चिढ़ाने लगे, जिससे नाराज होकर राधा रानी अपनी सखियों के साथ कृष्ण जी और ग्वालो को लाठी से पीटते हुए दौड़ाने लगी, तभी से बरसाना और नंद गांव में लठमार होली की शुरुआत हो गई। तब से ही यहां पर महिलाएं पुरुष को लाठियां से मारने की परंपरा को निभाती है, जबकि पुरुष खुद को बचाने की कोशिश करते हैं और लठमार होली का आनंद उठाते हैं। यहां रंगों के साथ-साथ फूलों की भी होली खेली जाती है।

लोगों में उत्साह

इस खास मौके पर बांके बिहारी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर सहित गोकुलधाम में लोगों के बीच अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। यहां होली के गीत पर बच्चों से लेकर बुजुर्ग हर कोई थिरकते हुए नजर आते हैं। गली मोहल्ले में बच्चे सुबह से ही एक-दूसरे के साथ होली खेलते हुए नजर आते हैं। फूलों और रंगों की होली खेली जाती है। सभी के घरों में तरह-तरह के पकवान बनाएं जाते हैं। बाजारे रंग-बिरंगे गुलालों और पिचकारियों से सजधर कर तैयार है।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)

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