हर साल सूर्य और चंद्र ग्रहण लोगों के बीच उत्सुकता का विषय बनते हैं, लेकिन साल 2027 में लगने वाला सूर्य ग्रहण कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार 2 अगस्त 2027 को लगने वाला यह पूर्ण सूर्य ग्रहण लगभग 6 मिनट 23 सेकंड तक रहेगा, जिसे इस सदी के सबसे लंबे सूर्य ग्रहणों में गिना जा रहा है। यही वजह है कि अभी से दुनिया भर में इस खगोलीय घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
खगोल विज्ञान के जानकार बताते हैं कि जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक देता है, तब सूर्य ग्रहण होता है। 2027 का ग्रहण इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि उस समय चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत ज्यादा करीब होगा। इसी कारण ग्रहण की अवधि सामान्य सूर्य ग्रहणों की तुलना में अधिक लंबी रहने वाली है।
सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों की उत्सुकता का एक बड़ा कारण इतिहास भी है। करीब 107 साल पहले 29 मई 1919 को लगा सूर्य ग्रहण विज्ञान की दुनिया में एक ऐतिहासिक घटना साबित हुआ था। उस समय ब्रिटिश वैज्ञानिक आर्थर एडिंगटन ने ग्रहण के दौरान तारों की स्थिति का अध्ययन किया था। इसी अध्ययन ने अल्बर्ट आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत को मजबूत आधार दिया था। उस ग्रहण के दौरान लगभग 6 मिनट 51 सेकंड तक अंधेरा छाया रहा था, जो उस दौर की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक घटनाओं में शामिल है।
भारत में कैसा दिखाई देगा 2027 का सूर्य ग्रहण?
वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देगा। हालांकि देश के कई हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जा सकेगा। इसका मतलब है कि सूर्य का एक बड़ा हिस्सा चंद्रमा से ढका नजर आएगा, लेकिन पूरी तरह अंधेरा नहीं होगा।
फिर भी खगोल प्रेमियों के लिए यह दृश्य बेहद खास रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहण को देखने के लिए हमेशा प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष चश्मों का उपयोग करना चाहिए। बिना सुरक्षा उपकरणों के सीधे सूर्य को देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
सूर्य ग्रहण और सूतक काल को लेकर क्या हैं मान्यताएं?
धार्मिक मान्यताओं में सूर्य ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार यदि ग्रहण किसी क्षेत्र में दिखाई देता है, तो वहां सूतक काल प्रभावी माना जाता है। परंपरा के अनुसार सूतक ग्रहण शुरू होने से लगभग 12 घंटे पहले शुरू माना जाता है और ग्रहण समाप्त होने तक चलता है।
इस दौरान कई लोग पूजा-पाठ, मंदिर दर्शन और शुभ कार्यों से परहेज करते हैं। गर्भवती महिलाओं को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।






