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Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती आज, अपनों को भेजें प्रेम, अहिंसा और सत्य का मार्ग दिखाने वाले शुभकामना संदेश

Written by:Diksha Bhanupriy
Published:
महावीर जयंती केवल एक पर्व नहीं बल्कि भक्तों को जीवन जीने की शैली सिखाने वाला एक खास दिन है। इस दिन आप अपनों को कुछ खास संदेशों के जरिए बधाई दे सकते हैं।
Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती आज, अपनों को भेजें प्रेम, अहिंसा और सत्य का मार्ग दिखाने वाले शुभकामना संदेश

भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में महावीर जयंती मनाई जाती है। वो हैं धर्म के 24वें तीर्थंकर के रूप में पहचाने जाते हैं। जिन्होंने लोगों को सत्य, अहिंसा और करुणा के पथ पर चलने की शिक्षा दी।

भगवान महावीर का जन्म कल्याणक केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि हमारे जीवन में जागरूकता लाकर हमें सही तरीके से जीने की प्रेरणा देता है। इस दिन हर कोई उत्सव में डूबा दिखाई देता है और अपनों को बधाइयां भी देता है। हम आपके लिए कुछ शुभकामना संदेश लेकर आए हैं, जो आप अपनों को भेज सकते हैं।

महावीर जयंती शुभकामना संदेश

महावीर जिनका नाम है,
पालीताना जिनका धाम है,
अहिंसा जिनका नारा है,
ऐसे त्रिशला नंदन को
लाख प्रणाम हमारा है।

सत्य अहिंसा धर्म हमारा, नवकार हमारी शान है,
महावीर जैसा नायक पाया, जैन हमारी पहचान है।

सत्य और प्रेम का हो मार्गदर्शन,
हर जीवन में हो शांति और अनुशासन।
महावीर जयंती की शुभकामनाएं

भगवान महावीर को खोजने हम कहा जाएंगे,
बिना ठिकाना उनको हम कहां पाएंगे।
करो भक्ति चंदना जैसी बंधुओं,
भगवान महावीर तुम्हारे द्वार स्वयं चले आएंगे।

महावीर के विचारों को अपनाएं,
जीवन जो सुंदर और शांत बनाएं।
महावीर जयंती की शुभकामनाएं

कैसे मनाई जाती है महावीर जयंती

महावीर जयंती का दिन जैन समुदाय के लिए त्यौहार की तरह होता है। इस दिन मंदिरों की सजावट की जाती है और भगवान महावीर का अभिषेक किया जाता है। रथ यात्रा निकलने के साथ दान पुण्य किया जाता है। इस दिन भगवान महावीर की पंचमहाव्रत शिक्षाएं सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह को याद किया जाता है, जो हैं धर्म की आधारशिला है।

भगवान महावीर का जीवन

तकरीबन 2500 साल पहले वैशाली गणराज्य के क्षत्रिय कुंड नामक एक गांव में रहने वाले क्षत्रिय राज परिवार में भगवान महावीर का जन्म हुआ था। उनके पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला थीं। राजसी परिवार में जन्मे वर्धमान में 30 साल की उम्र में राजपाट त्याग दिया और ज्ञान की तलाश में तपस्या करने निकल पड़े। 12 वर्षों तक उन्होंने कठिन तप किया और ऋजुबालिका नदी के तट पर स्थित शाल वृक्ष के नीचे उन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति हुई। दिव्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद उन्होंने उडीसा, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्र में भ्रमण कर धर्म का प्रचार प्रसार किया। 72 वर्ष की उम्र में कार्तिक अमावस्या पर दीपावली के दिन भगवान महावीर ने मोक्ष प्राप्त किया था।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है। View all posts by Diksha Bhanupriy
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