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मौनी अमावस्या पर यह व्रत कथा पढ़ ली तो बदल जाएगी किस्मत, मिलेगा शांति और समृद्धि का वरदान

Written by:Bhawna Choubey
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मौनी अमावस्या का दिन स्नान, व्रत, दान और मौन साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से मानसिक शांति, जीवन में सुख-समृद्धि और पुराने कष्टों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
मौनी अमावस्या पर यह व्रत कथा पढ़ ली तो बदल जाएगी किस्मत, मिलेगा शांति और समृद्धि का वरदान

मौनी अमावस्या हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर साल माघ महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है, क्योंकि यह आत्मशुद्धि, संयम और मौन साधना से जुड़ा हुआ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर किया गया स्नान, व्रत और दान कई जन्मों के पापों को नष्ट कर देता है।

इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र नदियों गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा में स्नान करते हैं। स्नान के बाद लोग मौन व्रत रखते हैं, पितरों के लिए तर्पण करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं। ऐसा माना जाता है कि मौनी अमावस्या पर व्रत कथा का पाठ करने से मन को शांति, घर में सुख-समृद्धि और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

मौनी अमावस्या का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, इस दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था, इसलिए इसे “मौनी” कहा गया। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर भगवान विष्णु और शिव की आराधना करने से आत्मबल बढ़ता है।

मौनी अमावस्या पर किया गया दान अक्षय फल देता है। इस दिन पितरों के लिए तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है। मौन व्रत रखने से मन की अशांति दूर होती है। यही कारण है कि मौनी अमावस्या को साधना, संयम और आत्मचिंतन का पर्व माना जाता है।

मौनी अमावस्या व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, कांचीपुरी नगर में देवस्वामी नाम के एक विद्वान ब्राह्मण रहते थे। वे अपनी पत्नी धनवती के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनके सात पुत्र और एक पुत्री थी, जिसका नाम गुणवती था। समय बीतने के साथ सभी संतानें बड़ी हो गईं।

जब विवाह का समय आया, तो देवस्वामी ने सबसे पहले अपनी पुत्री गुणवती का विवाह करने का निश्चय किया। उन्होंने उसकी कुंडली अपने सबसे छोटे पुत्र को देकर एक प्रसिद्ध ज्योतिषी के पास भिजवाया।

कुंडली का भयावह योग और पिता की चिंता

ज्योतिषी ने कुंडली देखकर जो बताया, उससे पूरे परिवार में चिंता छा गई। ज्योतिषी ने कहा कि गुणवती के विवाह के तुरंत बाद उसके पति की मृत्यु का योग है। यह सुनकर देवस्वामी अत्यंत दुखी हो गए।

उन्होंने कई विद्वानों से सलाह ली, लेकिन कोई उपाय नहीं मिला। अंत में वे एक महात्मा के पास पहुंचे। महात्मा ने बताया कि सिंहल द्वीप पर सोमा नाम की एक धोबिन रहती है, जो अत्यंत पतिव्रता और पुण्यात्मा है। यदि वह विवाह से पहले गुणवती को आशीर्वाद दे दे, तो यह दोष समाप्त हो सकता है।

सिंहल द्वीप की कठिन यात्रा और गिद्ध की सहायता

महात्मा की बात मानकर देवस्वामी ने अपनी पुत्री गुणवती और छोटे पुत्र को सिंहल द्वीप भेजा। यात्रा आसान नहीं थी। रास्ते में दोनों समुद्र किनारे एक पीपल के पेड़ के नीचे रुके। उस पेड़ पर गिद्धों का एक परिवार रहता था।

दिन में घोंसले में केवल गिद्ध के बच्चे थे। उन्होंने भाई-बहन की बातचीत सुन ली और समझ गए कि वे रास्ता भटक गए हैं। शाम को जब गिद्ध वापस आया, तो बच्चों ने पूरी बात उसे बता दी।

गिद्ध को उन पर दया आ गई। उसने उन्हें भोजन कराया और स्वयं उनकी मदद करने का निर्णय लिया। गिद्ध की सहायता से दोनों सुरक्षित सिंहल द्वीप पहुंच गए। यह प्रसंग बताता है कि सच्चाई और विनम्रता से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

सोमा धोबिन का आशीर्वाद और दोष से मुक्ति

सिंहल द्वीप पहुंचकर गुणवती ने सोमा धोबिन से मुलाकात की। सोमा ने उनकी पूरी कथा सुनी और करुणा से भर गई। उसने विधि-विधान से पूजा की और गुणवती को आशीर्वाद दिया कि उसका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा।

आशीर्वाद के बाद भाई-बहन अपने घर लौट आए। समय आने पर गुणवती का विवाह हुआ और ज्योतिषी द्वारा बताया गया दोष पूरी तरह समाप्त हो गया। उसका वैवाहिक जीवन सुख और समृद्धि से भर गया।

मौनी अमावस्या पर व्रत और पूजा कैसे करें

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या जल से स्नान करें।
  • भगवान विष्णु और शिव का पूजन करें।
  • मौन व्रत रखें और झूठ, क्रोध से दूर रहें।
  • मौनी अमावस्या व्रत कथा का पाठ करें।
  • अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
  • इन उपायों से मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता आती है।

आज के समय में मौनी अमावस्या का महत्व

आज के भागदौड़ भरे जीवन में मौनी अमावस्या हमें रुककर सोचने का अवसर देती है। यह पर्व सिखाता है कि कुछ समय मौन रहकर आत्मचिंतन करना भी जरूरी है। व्रत कथा का पाठ हमें धैर्य, श्रद्धा और सकारात्मक सोच का मार्ग दिखाता है। जो लोग नियमित रूप से मौनी अमावस्या पर व्रत और दान करते हैं, उनके जीवन में मानसिक तनाव कम होता है और पारिवारिक सुख बढ़ता है।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता।