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अधिकमास में शुक्र प्रदोष व्रत कब है? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और शिव कृपा पाने के उपाय

Written by:Bhawna Choubey
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अधिकमास में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन की परेशानियां दूर होने, सुख-समृद्धि बढ़ने और शिव कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। जानिए व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा के आसान उपाय।

हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत को बेहद खास माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास के दौरान पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत विशेष महत्व रखता है, क्योंकि अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है और इसे पूजा-पाठ के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में शिव भक्तों के लिए शुक्र प्रदोष व्रत भक्ति और साधना का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को शाम 7 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी और 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष व्रत में पूजा का महत्व प्रदोष काल से जुड़ा होता है, इसलिए यह व्रत 12 जून, शुक्रवार को रखा जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रदोष काल भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 7:36 बजे से रात 9:20 बजे तक रहेगा। इस अवधि में शिवलिंग का अभिषेक, मंत्र जाप और आरती करना विशेष फलदायी माना गया है।

ज्योतिष जानकारों का मानना है कि प्रदोष व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक सोच के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। नियमित रूप से यह व्रत करने वाले लोगों को आत्मिक संतुलन और मन की स्थिरता का अनुभव होता है।

प्रदोष व्रत पूजा विधि और शिव कृपा पाने का सरल तरीका

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें। यदि घर में शिवलिंग हो तो उसकी स्थापना कर पूजा शुरू करें।

पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और सफेद चंदन अर्पित करें। इसके साथ ही कनेर या अन्य सुगंधित फूल चढ़ाए जा सकते हैं। घी का दीपक जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें और प्रदोष व्रत कथा का श्रवण करें।

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई आरती और प्रार्थना से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के अंत में परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता की कामना करें।

अधिकमास में पड़ने वाला यह शुक्र प्रदोष व्रत भक्तों के लिए विशेष अवसर माना जा रहा है। शिव भक्ति, संयम और श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है। यही कारण है कि देशभर के शिव मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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