आज, 12 अगस्त 2026 को सावन अमावस्या (हरियाली अमावस्या) के दिन साल का दूसरा और अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। भारतीय समयानुसार, बुधवार (12 अगस्त ) की रात 9:04 बजे शुरू होगा और मध्य रात्रि को पार करते हुए मध्यरात्रि के बाद (13 अगस्त की) 01:27 बजे समाप्त होगा। चूंकि ग्रहण की पूरी अवधि भारत में रात के समय होगी, जब सूर्य पहले से ही क्षितिज के नीचे छिपा होगा , इसलिए यह सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा ।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल भी मान्य नहीं होता है, इसलिए इस दिन भारत में सामान्य पूजा-पाठ, सावन अमावस्या के अनुष्ठान और दैनिक कार्य यथावत जारी रहेंगे। शुभ कार्यों पर किसी भी प्रकार की कोई रोक नहीं रहेगी। इस ग्रहण के 15 दिन के बाद 28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण होगा लेकिन इसे भी भारत मे नहीं देखा जा सकेगा । भारत मे ग्रहण के लिए 2 अगस्त 2027 तक का इंतजार करना होगा जब यह आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में दिख सकेगा
सूर्य ग्रहण के चलते यूरोप में 27 साल बाद दिन में रात
नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि आज अंतरिक्ष में एक बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक खगोलीय घटना होने जा रही है। आज साल का सबसे बड़ा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा, जिसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय ही पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा। यह सूर्य ग्रहण विशेष रूप से यूरोप महाद्वीप के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि वहां पूरे 27 साल बाद कोई पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देने जा रहा है। इससे पहले यूरोप ने साल 1999 में ऐसा नजारा देखा था।
भारत को छोड़कर कहां-कहां दिखेगा ग्रहण
सारिका घारू ने बताया कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा की विशाल छाया पृथ्वी के एक बड़े हिस्से को कवर करेगी। पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य मार्ग उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल से होकर गुजरेगा, जहाँ लोग दिन में रात होने का अनुभव करेंगे। इसके अलावा, पूरे यूरोप, कनाडा और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।
कब लगता है सूर्य ग्रहण
ज्योतिष के मुताबिक, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तो चंद्रमा सूर्य की पूरी गोलाकार सतह को ढक देता है और सूरज की रोशनी धरती तक पहुंच नहीं पाती है, तब पूर्ण सूर्य ग्रहण लगता है। आंशिक सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढक पाता है, केवल एक हिस्सा ही ढका होता है, चंद्रमा सूर्य के सिर्फ एक हिस्से को ढंकता हुआ नजर आता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर हो, तब यह पूरी तरह सूर्य को ढक नहीं पाता, जिस कारण हमें सूर्य ग्रहण के दौरान आसमान में एक ‘आग का छल्ला (Ring of fire)’ दिखता है।
12 अगस्त 2026 के ग्रहण का समय
- प्रारंभ: 12 अगस्त, रात 9:04 बजे
- पूर्ण ग्रहण (पीक): रात 11:16 बजे
- समापन: 13 अगस्त, रात 1:27 बजे
- कुल अवधि: 4 घंटे 23 मिनट


(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)






